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यौन उत्पीड़न मामले में घिरे ACP विवेक भगत का 'प्रमोशन' रुका, अधिकारी ने खुद किया अतिरिक्त प्रभार हटाने का अनुरोध

Published: Tue, 06 Oct 2026 09:07 AM (IST)

यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत से दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त DCP का कार्यभार ...और पढ़ें

एसडीपीओ के रूप में तैनात एसीपी विवेक भगत पर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है।

एसडीपीओ के रूप में तैनात एसीपी विवेक भगत पर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है।

HighLights

  1. एसीपी विवेक भगत से अतिरिक्त डीसीपी कार्यभार वापस लिया गया।

  2. महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।

  3. भगत ने स्वयं जांच पूरी होने तक प्रभार हटाने का अनुरोध किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के एसीपी (एसीपी) विवेक भगत को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रविवार देर रात उनका अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अतिरिक्त डीसीपी) का कार्यभार वापस ले लिया है। जारी नए संशोधित आदेश के तहत, दानिप्स श्रेणी के 12 अधिकारियों की सूची में से विवेक भगत का नाम हटा दिया गया है। अब केवल शेष 11 अधिकारियों को ही यह तात्कालिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

वर्तमान में कनॉट प्लेस के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में तैनात विवेक भगत पर शनिवार को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार व उत्पीड़न का आरोप लगा है।

यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महिलाओं की शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।

खुद की अपील पर लिया गया फैसला

दिल्ली सरकार के आधिकारिक एक्स हैंडल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एसीपी विवेक भगत ने स्वयं अनुरोध किया था कि जब तक इस पूरे मामले की जांच पूरी होकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुँच जाती, तब तक उन्हें यह अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए।

गौरतलब है कि 5 अक्टूबर को जारी किया गया प्रारंभिक आदेश 25 अगस्त को भेजे गए एक प्रस्ताव पर आधारित था, जो इस घटना से काफी पहले की प्रक्रिया थी।

सरकार व प्रशासन की सफाई

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त कार्यभार केवल एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसे 'करंट ड्यूटी चार्ज' कहा जाता है। इसका कोई वित्तीय लाभ या पदोन्नति (प्रमोशन) जैसा दर्जा नहीं होता और न ही इसके तहत नियमित अतिरिक्त डीसीपी के वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पहले जारी सूची में शामिल थे 12 नाम

मूल सूची में डॉ. विकास शेओकेन्द, ए. वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, साकरिया मिहिर प्रवीनभाई, गरिमा तिवारी, विवेक भगत, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता का नाम शामिल था।

संशोधन के बाद केवल विवेक भगत को इस सूची से बाहर किया गया है। महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों और संगठनों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर दोषी अधिकारियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की थी।

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