Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    दिल्ली एम्स की ऐतिहासिक सफलता: भारत की पहली लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी रही सफल, जटिल ऑपरेशन में बड़ी छलांग

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 09:29 PM (GMT+05:30)

    एम्स दिल्ली ने एक बच्चे पर भारत की पहली लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह दुर्लभ और जटिल प्रक्रिया पीडियाट्रिक एंडोस्कोपिक सर्जन्स ऑफ ...और पढ़ें

    एम्स) नई दिल्ली ने की भारत की पहली लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी। प्रतीकात्मक तस्वीर

    एम्स) नई दिल्ली ने की भारत की पहली लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी। प्रतीकात्मक तस्वीर

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली ने बच्चे में भारत की पहली लैप्रोस्कोपिक व्हिपल सर्जरी कर अपनी श्रेष्ठता को साबित किया है। एम्स ने यह सफलता बाल शल्य चिकित्सा के क्षेत्र पीडियाट्रिक एंडोस्कोपिक सर्जन्स ऑफ इंडिया के वार्षिक सम्मेलन ‘पेस्कान 2026’ के दौरान हासिल की।

    दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन

    यह दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन है। व्हिपल प्रक्रिया, जिसे तकनीकी रूप से पैंक्रियाटिकोडुओडिनेक्टाॅमी कहा जाता है, सामान्य शल्य चिकित्सा की सबसे जटिल सर्जरी में गिनी जाती है। इसमें अग्न्याशय के सिर, पित्ताशय, पित्त नली और छोटी आंत के हिस्से को हटाकर पुनर्निर्माण किया जाता है। बच्चों में इस प्रक्रिया को लैप्रोस्कोपिक तकनीक से करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि उनकी शारीरिक संरचना अधिक संवेदनशील होती है।

    एम्स के बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर संदीप अग्रवाल ने इसे न्यूनतम आक्रामक शल्य चिकित्सा क्षमताओं में बड़ी छलांग बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत में बाल शल्य चिकित्सा के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण है।

    बेहतर रिकवरी और कम पीड़ा

    लैप्रोस्कोपिक दृष्टिकोण से बच्चों को पारंपरिक खुली सर्जरी की तुलना में कम दर्द, कम रक्तस्राव, अस्पताल में कम समय और तेजी से स्वस्थ होने का लाभ मिलता है, साथ ही सौंदर्यात्मक परिणाम भी बेहतर होते हैं।

    खबरें और भी

    क्यों करनी है पड़ती सर्जरी

    व्हिपल सर्जरी बच्चों में तब की जाती है, जब अग्न्याशय, पित्त नली या छोटी आंत के शुरुआती हिस्से में गंभीर बीमारी, ट्यूमर या जन्मजात विकृति हो और दवाओं से इलाज संभव न रहे। इसका उद्देश्य रोगग्रस्त हिस्सों को पूरी तरह हटाकर पाचन तंत्र को पुनः सामान्य बनाना होता है, जिससे बच्चे का जीवन बच सके और दीर्घकालिक स्वास्थ्य बेहतर हो।

    उपलब्धि पर एम्स निदेशक ने बधाई दी

    एम्स निदेशक प्रोफेसर एम. श्रीनिवास ने कहा कि इस सफलता ने वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति प्रस्तुत की है। कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की नवाचार, उन्नत तकनीक और बहुविषयक सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पेस्कान 2026 के माध्यम से एम्स ने एक बार फिर भारत को उन्नत बाल न्यूनतम शल्य चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।

    यह भी पढ़ें- दिल्ली में एम्स वैज्ञानिक से फर्जी जमीन सौदे में ठगी की कोशिश, जान से मारने की धमकी