विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की अनुमति के बाद नाबालिग पीड़िता के यहां समयपूर्व जन्मा नवजात, परिजनों ने ठुकराया

Published: Fri, 08 May 2026 02:05 AM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की अनुमति मिलने के बाद एम्स में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के यहां समयपूर्व नवजात का जन्म ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की अनुमति मिलने के बाद एम्स में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के यहां समयपूर्व नवजात का जन्म हुआ।

सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की अनुमति मिलने के बाद एम्स में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के यहां समयपूर्व नवजात का जन्म हुआ।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की दी थी अनुमति।

  2. एम्स में प्रक्रिया के दौरान समयपूर्व नवजात का हुआ जन्म।

  3. पीड़िता व परिजनों ने नवजात को अपनाने से किया इनकार।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग किशोरी के गर्भ समापन से जुड़े मामले ने अब नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट से गर्भ समापन की अनुमति मिलने के बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान समयपूर्व नवजात का जन्म हो गया। जन्म के बाद से नवजात एम्स में चिकित्सकों की विशेष निगरानी में है, जबकि पीड़िता और उसके स्वजन ने नवजात को अपनाने और अपने साथ रखने से इन्कार कर दिया है। इससे दुविधा खड़ी हो गई है।

एम्स सूत्रों के अनुसार नाबालिग की गर्भावस्था उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी थी और चिकित्सकीय राय के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। कोर्ट ने नाबालिग की इच्छा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गर्भ समापन की अनुमति दी थी। इसके बाद एम्स में चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की गई पर, प्रक्रिया के दौरान लगभग 29 सप्ताह के आसपास समयपूर्व प्रसव हुआ और नवजात का जन्म हुआ। जन्म के समय उसका वजन करीब 1,380 ग्राम बताया गया।

फिलहाल नवजात को एम्स के नवजात गहन चिकित्सा विभाग में रखा गया है। चिकित्सकों का कहना है कि समयपूर्व जन्म के कारण बच्चे को लगातार विशेष निगरानी और चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है। उसकी स्थिति स्थिर बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसकी निगरानी कर रही है।

अस्पताल प्रशासन ने मामले की सूचना चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को दे दी है। साथ ही चाइल्ड प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और उसकी निगरानी में आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्थिर होने के बाद नवजात को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली स्थित चाइल्ड केयर होम भेजा जाएगा। आगे बच्चे की देखभाल, संरक्षण और संभावित दत्तक ग्रहण से जुड़े निर्णय सेंट्रल अडाप्शन रिसोर्स अथारिटी (कारा) के दिशा-निर्देशों के तहत लिए जाएंगे।

इस मामले ने कानूनी, चिकित्सकीय और सामाजिक स्तर पर कई संवेदनशील प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस बारे में पूछे जाने पर एम्स जनसंपर्क विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कोई भी जानकारी देने से इनकार दिया।

यह भी पढ़ें: यमुना में रेत माफियाओं की अब खैर नहीं, मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए लोकल इंटेलिजेंस और बीट स्टाफ तैनात

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।