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    क्या है मनी लॉन्ड्रिंग का मामला? जिसमें अल फलाह यूनिवर्सिटी के चैयरमैन जवाद अहमद को लगा झटका 

    Updated: Sun, 03 May 2026 10:40 AM (IST)

    साकेत कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में अल फलाह ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन पर ट्रस्ट के माध्यम से 493.24 करो ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. साकेत कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत अर्जी खारिज की

    2. अल फलाह ट्रस्ट पर 493.24 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

    3. ईडी ने धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया

    जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में शनिवार को अल फलाह ट्रस्ट के अध्यक्ष चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन्होंने अल फलाह ट्रस्ट से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मांगी थी।

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पहले ही उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुका है। आरोप है कि ट्रस्ट ने अपराध से हासिल 493.24 करोड़ रुपये की रकम जुटाई। यह रकम संस्थानों में छात्रों का एडमिशन कराकर फीस के तौर पर मिली थी।

    क्या है पूरा मामला?

    अभियोजन एजेंसी का आरोप है कि आरोपित ने हरियाणा सरकार से 'आवश्यक प्रमाण पत्र' (इशेंशियल सर्टिफिकेट) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मंजूरी पाने के लिए कई नियमक संस्थाओं को धोखा दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने आरोपित के वकील और ईडी के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

    जमानत खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, "यह साफ है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी, ट्रस्ट, कालेज से अपराध से हासिल जो रकम मिली थी, उसे संबंधित पक्षों-यानी आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, कारकुन कंस्ट्रक्शंस एंड डेवलपर्स और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को भेजा गया।

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    इन कंपनियों के मालिक उनकी पत्नी, बच्चे और भरोसेमंद कर्मचारी थे, पर असल में इन पर नियंत्रण उन्हीं का था। उन्होंने इस पैसे को भारत से विदेश भेजा और वहां कारोबार, चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया।"

    फर्जी तरीकों से मंजूरी पाने के लिए धोखाधड़ी

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, "इस तरह, मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के तौर पर उन्होंने अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग किया। उन्होंने धर्मार्थ और शैक्षणिक संस्थानों को अपने, अपने परिवार और व्यावसायिक फायदे के लिए एक जरिया बनाया, जो कानूनी दायित्वों का उल्लंघन है।"

    जवाद अहमद सिद्दीकी ने वकील तालिब मुस्तफा के जरिये यह अर्जी दाखिल की थी। ईडी की तरफ से विशेष वकील जोहेब हुसैन पेश हुए, जिनकी मदद प्रांजल त्रिपाठी ने की। उन्होंने कई आधारों पर जमानत अर्जी का विरोध किया। यह दलील दी गई कि आरोपित और अल-फलाह समूह ने छात्रों को लुभाने और विभिन्न नियामकों से फर्जी तरीकों से मंजूरी पाने के लिए कई धोखाधड़ी वाले तरीके अपनाए।

    ईडी ने बताया कि नैक एक्रेडिटेशन के बिना गुजारे गए सालों की कुल आय और सेक्शन 12(बी) के तहत यूजीसी मान्यता के झूठे दावे के कारण, आरोपित ने अपराध से कमाई की। यह कमाई अल फलाह चैरिटेबल ट्र्स्ट, अल फलाह यूनिवर्सिटी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत आने वाले मेडिकल कालेज समेत सभी संस्थानों को मिली शैक्षणिक रसीदों के रूप में थी, जिसकी कुल रकम 493.24 करोड़ रुपये है।

    एजेंसी ने यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इससे पहले, वकील जोहेब हुसैन ने दलील दी थी कि यह एक गंभीर मामला है। दिल्ली धमाका मामले में नामजद कुछ आरोपित फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर रहे थे।