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सीजेपी प्रोटेस्ट: 'याचिका सुनवाई योग्य नहीं', रत्ना सिंह की मांग को साकेत कोर्ट ने ठुकराया

By GouriEdited By: Kapil Kumar
Published: Sat, 10 Oct 2026 02:47 PM (GMT+05:30)

साकेत कोर्ट ने सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका ...और पढ़ें

रत्नी सिंह ने दिल्ली पुलिस पर गलत तरीके से हिरासत में लेने का आरोप लगाया। वीडियो ग्रैब

रत्नी सिंह ने दिल्ली पुलिस पर गलत तरीके से हिरासत में लेने का आरोप लगाया। वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. साकेत कोर्ट ने रत्ना सिंह की याचिका खारिज की।

  2. पुलिस के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई थी।

  3. याचिका में आवश्यक हलफनामा और नाम नहीं था।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दिल्ली में साकेत कोर्ट ने शनिवार को सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने और स्टेट्स रिपोर्ट तलब करने की मांग की थी।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडेय की अदालत ने कहा कि याचिका आवश्यक हलफनामे के बिना दाखिल की गई थी। साथ ही, इसमें किसी विशिष्ट सरकारी कर्मचारी का नाम भी नहीं बताया गया था, जिसके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाते समय रत्ना सिंह को पुलिस ने गलत तरीके से रोका था।

दो कारें खड़ी कर रास्ता रोका

आवेदन के अनुसार, वह दो अन्य अधिवक्ताओं के साथ जा रही थीं। बाद में अपने आवास के बाहर वह अधिवक्ता तारा नरूला के साथ कार में बैठी थीं, तभी उनकी गाड़ी के आगे और पीछे दो कारें खड़ी कर रास्ता रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का कानूनी आधार भी नहीं बताया।

अदालत ने कहा कि आवेदन में संबंधित पुलिस अधिकारी की पहचान नहीं बताई गई है। ऐसे में उसके वरिष्ठ अधिकारी से रिपोर्ट मांगना संभव नहीं है। कोर्ट ने एनसीआर दर्ज करने की वैकल्पिक मांग भी खारिज कर दी।

याचिका सुनवाई योग्य नहीं

अदालत के अनुसार, आवेदन में लगाए गए आरोप भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126 और 127 के तहत संज्ञेय अपराधों से संबंधित हैं। इसलिए गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज करने की मांग भी स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि मौजूदा स्वरूप में याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।

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