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दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन खत्म, लौटा अतिक्रमण; घुटने लगी दिल्ली के 'दिल' की सांसें

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:27 PM (IST)

ब्रिक्स सम्मेलन समाप्त होते ही कनॉट प्लेस में अवैध रेहड़ी-पटरी वाले और भिखारी लौट आए हैं, जिससे दिल्ली के 'दिल' में फिर अतिक्रमण की समस्या बढ़ गई है।

ब्रिक्स सम्मेलन समाप्त होते ही कनॉट प्लेस में अवैध रेहड़ी-पटरी वाले और भिखारी लौट आए। (एआई जेनरेटेड इमेज)

ब्रिक्स सम्मेलन समाप्त होते ही कनॉट प्लेस में अवैध रेहड़ी-पटरी वाले और भिखारी लौट आए। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. ब्रिक्स के बाद कनॉट प्लेस में अवैध अतिक्रमण की वापसी।

  2. व्यापारी संघ ने एनडीएमसी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

  3. अतिक्रमण के खिलाफ सड़क से कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की तैयारी।

नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। ब्रिक्स संपन्न हो गया और इसके साथ खत्म हो गई दिल्ली के दिल की खुशफहमी और आजादी भी। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन खत्म होते ही सोमवार को उसकी खुशियों को रौंदते हुए अवैध रेहड़ी-पटरी वालोंं का जत्था लौट आया। फिर उसका दम घुटने लगा है। कनॉट प्लेस (सीपी) के ए, ई, एफ समेत ब्लॉकों के गलियारों, फुटपाथों और सड़कों पर शाम तलक 300 से अधिक अवैध रेहड़ी-पटरी वालों की मौजूदगी हो गई थी।

भिखारी और बेघर भी लौट आने लगे हैं। रविवार तक तीन दिनों के सम्मेलन के दौरान सीपी अलग ही मिजाज में था। अतिक्रमण, भिखारियों और अवैध वेंडर्स से मुक्ति से वह खुलकर सांसे ले रहा था। यहां आने वाले लोग तथा दुकानदार 80 के दशक की सीपी को तब याद करने लगे थे और कहने लगे थे कि काश लौट आए वह पुराने दिन...। पर ऐसा नहीं हुआ।

उच्च न्यायालय द्वारा नो-हाकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किए जाने के बावजूद इस दुस्साहस को नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) ने नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) में व्याप्त भ्रष्टाचार से जोड़ा। पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त सीपी की मांग रखते हुए 69 वैध लाइसेंस धारकों को सीपी से बाहर किसी उपयुक्त स्थान पर रोजगार देने की मांग की।

सतर्कता विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप

व्यापारियों का गुस्सा उस वक्त और भड़क गया जब कनॉट प्लेस के नए सतर्कता (विजिलेंस) इंस्पेक्टर का एक कथित आडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने लगा। आरोप है कि इस अधिकारी ने अवैध रेहड़ी-पटरी वालों के एक वाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालकर सूचना दी कि निदेशक व संयुक्त निदेशक सतर्कता का निरीक्षण होने वाला है, इसलिए साढ़े छह से सात बजे तक सभी ब्लाकों से दुकानें हटा ली जाएं।

व्यापारियों का कहना है कि जिस अधिकारी पर अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी है, वही वेंडर्स को सतर्क कर रहा है। इस संबंध में सतर्कता निदेशक रमेश चंद मीणा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला।

सड़क से कोर्ट तक लड़ेंगे लड़ाई

एनडीटीए ने स्थिति को अति गंभीर बताते हुए उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस, एनडीएमसी, स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा का दरवाजा खटखटाते हुए तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है। एनडीटीए के अध्यक्ष अतुल भार्गव, महासचिव विक्रम बधवार व संयुक्त सचिव अमित गुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना जारी रही, तो वे आखिरकार दुकानें बंद कर धरना-प्रदर्शन को मजबूर होंगे। वह नहीं चाहते हैं कि स्थिति इतनी खराब हो।

पदाधिकारियों ने कहा कि ब्रिक्स के दौरान और उसके बाद की तस्वीरों को साक्ष्य बनाकर हाइ कोर्ट में अवमानना याचिका वाले मामले में नए साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

सीसीटीवी से संदिग्ध गतिविधियों पर बढ़ाई निगरानी

इस क्रम में एनडीटीए की ओर से अतिक्रमण तथा संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी भी लगवाया जा रहा है। एक पदाधिकारी के अनुसार, अभी तक ऐसे करीब पांच कैमरे लगे हैं। एनडीटीए की कोशिश कनाट प्लेस में ऐसे 24-25 कैमरे लगवाने की है। हालांकि, उन्हें लगाते समय भी रेहड़ी पटरी वालों से भी विवाद की स्थिति बन रही है।

ब्रिक्स के दौरान दिखा 80 के दशक का सुकून

ज्ञात हो कि ब्रिक्स सम्मेलन के तीन दिनों में स्वच्छ, भव्य व व्यवस्थित सीपी को देखते व्यापारियों ने 80 के दशक को याद किया था, जब सीपी ऐसा ही था। उस दौरान 150 से अधिक रेस्तरां विदेशी मेहमानों से गुलजार रहे। व्यापारियों ने बताया कि सामान्य दिनों में सीपी आने वाले लोगों में से केवल 20 से 40 प्रतिशत ही वास्तविक खरीदार होते हैं, जबकि अतिक्रमण मुक्त वातावरण के दौरान 80 प्रतिशत लोग खरीदारी करने वाले थे। एनडीटीए पदाधिकारियों का दावा है कि कनाट प्लेस में अतिक्रमण और अवैध वेंडिंग के कारण सरकार को हर साल 50 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी का नुकसान हो रहा है।

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