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यमुना किनारे लौटेंगे ऐतिहासिक दिन, अगले 6 महीने में DDA चमकाएगा यमुना बाजार के 32 घाट

Published: Mon, 15 Jun 2026 08:37 PM (GMT+05:30)

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) यमुना बाजार क्षेत्र में स्थित 32 ऐतिहासिक घाटों का छह महीने में पुनरुद्धार करेगा।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) यमुना बाजार क्षेत्र में स्थित 32 ऐतिहासिक घाटों का छह महीने में पुनरुद्धार करेगा। इमेज एआई

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) यमुना बाजार क्षेत्र में स्थित 32 ऐतिहासिक घाटों का छह महीने में पुनरुद्धार करेगा। इमेज एआई

HighLights

  1. डीडीए 32 ऐतिहासिक यमुना घाटों का पुनरुद्धार करेगा।

  2. परियोजना छह महीने में चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी।

  3. यमुना रिवरफ्रंट आध्यात्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। वह यमुना बाजार क्षेत्र में स्थित 32 ऐतिहासिक घाटों को पुनर्जीवित करेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से अगले छह महीनों के भीतर धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

एलजी टीएस संधू के साथ हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में डीडीए ने इस पूरी कार्ययोजना और अब तक की उपलब्धियों का खाका पेश किया।

डीडीए अधिकारियों ने बताया कि यमुना बाजार और लोक निवास के पास के इन 32 घाटों के पुनरुद्धार के लिए इंटेक की मदद से एक विशेष अध्ययन कराया गया है। योजना के तहत घाटों के संरक्षण, आकर्षक लैंडस्केपिंग, पैदल यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यमुना रिवरफ्रंट को आध्यात्मिक पर्यटन, संस्कृति और पर्यावरण के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे दिल्ली के नागरिकों का नदी से जुड़ाव बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अधिकारियों के मुताबिक डीडीए यमुना के डूब क्षेत्र को साफ एवं सुंदर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। प्राधिकरण ने अब तक नदी के मैदानी इलाकों से 88,574 मीट्रिक टन मलबा और 4,998 मीट्रिक टन नगर निगम का कचरा साफ किया है।

इस बड़े सफाई अभियान के जरिए लगभग 1,425 एकड़ भूमि को अतिक्रमण और मलबे से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि करीब 1,700 हेक्टेयर डूब क्षेत्र में रिवरफ्रंट विकास का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। भूजल स्तर सुधारने और बाढ़ का प्रभाव प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए नई आर्द्रभूमि विकसित की गई हैं, जिनकी जल-धारण क्षमता 1,420 मिलियन लीटर के करीब है।

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