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DDA का पोर्टल सवालों के घेरे में: 3700 से ज्यादा जमीनों का डेटा ऑनलाइन, लेकिन अतिक्रमण की जानकारी गायब

Published: Wed, 24 Jun 2026 05:25 AM (IST)

डीडीए ने 3,700 से अधिक खाली संपत्तियों का ब्योरा ऑनलाइन किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से ...और पढ़ें

कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल। (AI Generated Image)

कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल। (AI Generated Image)

HighLights

  1. डीडीए ने 3,700 से अधिक खाली प्लाट ऑनलाइन किए।

  2. अतिक्रमण वाले प्लाटों का स्पष्ट डेटा उपलब्ध नहीं।

  3. अतिक्रमण की रिपोर्टिंग का जिम्मा जनता पर डाला।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने जमीन की धोखा-धड़ी रोकने के लिए अपनी 3,700 से अधिक खाली संपत्तियों का ब्योरा तो आनलाइन तो कर दिया है, लेकिन इसने उसकी कार्यशैली पर एक गंभीर सवालिया निशान भी खड़ा कर दिया है।

सवाल यह है कि डीडीए ने जो डेटा सार्वजनिक किया है, वह सिर्फ ''पूरी तरह खाली'' प्लाटों का है या इनमें वो जमीनें भी शामिल हैं जिन पर भू-माफिया कुंडली मारकर बैठे हैं? सूत्रों की मानें तो डीडीए के पास फिलहाल इस का कोई साफ वर्गीकृत आंकड़ा नहीं है कि उसकी कितने एकड़ जमीन पर वास्तव में अवैध कब्जा या अतिक्रमण हो चुका है।

''खाली प्लाट'' की सूची तो आई, पर ''कब्जे'' की कहानी गायब

डीडीए के ''वैकेंट लैंड मैनेजमेंट सिस्टम'' (वीएलएमएस) के जरिए जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इंजीनियरिंग, हार्टिकल्चर व मैनेजमेंट विंग के कुल 3,728 प्लाटों को वेबसाइट पर डाला गया है। लेकिन इस पूरी लिस्टिंग में सबसे बड़ा झोल यही है:-

-कागज बनाम हकीकत : वेबसाइट पर किसी जमीन का खसरा नंबर और एरिया देखकर जब कोई आम जन मौके पर जाएगा, तो असली स्थिति पता चलेगी। रिकार्ड में जिसे ''खाली'' दिखाया जा रहा, संभव है कि वहां सालों से कोई अवैध निर्माण या झुग्गी खड़ी हो।

-डेटा में वर्गीकरण का अभाव : पोर्टल पर यह कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन 3,728 प्लाटों में से कितने प्रतिशत हिस्से पर आंशिक या पूर्ण रूप से अतिक्रमण है। डीडीए का यह सिस्टम सिर्फ यह बताता है कि जमीन उसके मालिकाना हक में है, न कि यह कि जमीन मौके पर सुरक्षित है।

तो क्या जनता के भरोसे छोड़ी गई है जमीनों की पहरेदारी?

जानकारों का कहना है कि डीडीए ने अपनी इस लाचारी या जानकारी के अभाव को छिपाने के लिए ''सिटिजन आडिट'' का सहारा लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि पोर्टल पर ''खाली'' दिख रही जमीन पर वास्तव में कोई कब्जा है तो लोग उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं।

यानी, करोड़ों-अरबों की सरकारी जमीनों की सुरक्षा और उनके अतिक्रमण का पता लगाने की जो जिम्मेदारी डीडीए के फील्ड स्टाफ- इंस्पेक्टरों की थी, वह अब अनजाने में आम जनता के पाले में डाल दी गई है।

क्या है आनलाइन आंकड़ों की स्थिति

  • इंजीनियरिंग विंग के प्लाट : 2820
  • हार्टिकल्चर विंग के प्लाट : 756
  • मैनेजमेंट विंग के प्लाट : 192

जनता के लिए सलाह

संपत्ति खरीदते हुए इन बातों का खास ख्याल रखें

  • सिर्फ आनलाइन रिकार्ड पर भरोसा न करें : अगर डीडीए पोर्टल पर कोई जमीन खाली दिख रही है, तो यह न मान लें कि वह विवाद-मुक्त है। मौके पर जाकर ''फिजिकल वेरिफिकेशन'' जरूर करें।
  • अतिक्रमण की पोल खोलें : यदि वेबसाइट पर आपका पड़ोसी प्लाट डीडीए का ''वैकेंट लैंड'' दिखा रहा है और वहां अवैध कब्जा है तो पोर्टल के माध्यम से सीधे इसकी शिकायत दर्ज कराएं।

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