43 किमी, कई CCTV कैमरे, बिना रुके दौड़ती रही बस: दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद सुरक्षा पर उठे सवाल
चलती बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने राजधानी में लड़कियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े ...और पढ़ें

दिल्ली गैंगरेप की घटना पर सवाल, 47 किमी तक बिना जांच दौड़ती रही बस।
HighLights
नाबालिग पीड़िता से चलती बस में दुष्कर्म की वारदात।
बस 47 किमी तक बिना जांच के दौड़ती रही।
पुलिस की रात की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। चलती स्लीपर बस में नाबालिग पीड़िता के साथ चालक और कंडक्टर द्वारा की गई शर्मनाक वारदात ने रात के समय सुरक्षा-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक करीब 47 किलोमीटर के सफर में बस लगातार करीब एक घंटा 16 मिनट तक सड़कों पर दौड़ती रही।
इस दौरान पीड़िता मदद के लिए चिल्लाती रही और खुद को बचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन हैरानी की बात है कि इस दौरान बस को जांच के लिए कहीं नहीं रोका गया।
बस ग्रेटर नोएडा के परी चौक से रवाना हुई थी। वहां से नोएडा होते हुए बस ने दिल्ली की सीमा में प्रवेश किया। इसके बाद मयूर विहार, रिंग रोड और विकास मार्ग की तरफ बढ़ी। बस गीता कालोनी फ्लाईओवर से होते हुए फिर रिंग रोड पर पहुंची और अंत में कश्मीरी गेट पर जाकर रुकी। इस पूरे रास्ते में बस कई प्रमुख मार्गों और नाकों से होकर गुजरी, लेकिन किसी स्थान पर उसकी जांच नहीं की गई।
नोएडा-दिल्ली सीमा पर सुरक्षा-व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
सबसे अहम सवाल नोएडा-दिल्ली सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की निगरानी और संदिग्ध वाहनों की जांच के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी रहती है। इसके बावजूद स्लीपर बस बिना किसी रोक-टोक के राजधानी में दाखिल हो गई और कई प्रमुख मार्गों से गुजरती रही।
यदि सीमा पर या रास्ते में किसी नाके पर बस को रोककर जांच की जाती तो संभव है कि पीड़िता को उसी समय सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था। वहीं घटना ने रात के समय सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। बस के इतने लंबे सफर के दौरान किसी पुलिसकर्मी की नजर उस पर नहीं पड़ना व्यवस्था की खामी की ओर इशारा करता है।
स्टेयरिंग पर कंबल, गलियारे में पड़ी चादर बयां कर रही दरिंदगी का मंजर
जिस बस में आरोपितों ने वारदात को अंजाम दिया उसमें ड्राइविंग सीट पर बिखरा पड़ा कंबल और बस के गलियारे पर पड़ी चादर दरिंदगी का मंजर बयां कर रही है। वहीं सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन जैसे सिस्टम आखिर किस काम के हैं, अगर वारदात के दौरान कोई अलर्ट ही नहीं हुआ।
वहीं बस को सीज करने के बाद पुलिस ने उसकी फोरेंसिक जांच कराई। जांच के दौरान 10 से ज्यादा सुबूत मिलने की बात सामने आई है। इन सभी को वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस का फोकस अब सिर्फ आरोपितों के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि बस से जुड़े डिजिटल और वैज्ञानिक सबूतों को भी जोड़ा जा रहा है।
बस में चल रहा था मरम्मत का काम, चालू हालत में नहीं थे सीसीटीवी कैमरे
बस चलाने वाली कंपनी 'विश्वनाथ ट्रैवल्स' के मैनेजर मोनू के मुताबिक, आरोपित कुलदीप और संदीप दोनों ही दो साल से विश्वनाथ ट्रैवल्स के साथ काम कर रहे थे। घटना के समय बस की मरम्मत का काम चल रहा था और उसमें चालू हालत में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे।
उन्होंने बताया कि बस को मरम्मत के लिए सूरजपुर ले जाया गया था और उसके बाद उसे पेंटिंग के लिए कश्मीरी गेट ले जाया जा रहा था। बस के अंदर स्लीपर बर्थ पर कंपनी के लगाए हुए पर्दे थे, जिनकी वजह से आरोपित अपनी हरकतों को बाहर के लोगों से छिपा पाए। मोनू ने बताया कि हमें नहीं पता था कि उस दिन क्या हुआ। हमें बाद में पुलिस से पता चला।
