साइबर अपराधियों की खैर नहीं! दिल्ली में बनेगा D4C, 4 विंग करेंगी काम; AI टूल्स से होगी अपराधियों की निगरानी
राजधानी दिल्ली में साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली साइबर अपराध समन्वय केंद्र (डी4सी) का गठन किया जा रहा है।

उपराज्यपाल के आदेश पर दिल्ली साइबर अपराध समन्वय केंद्र का गठन किया जा रहा है।
HighLights
दिल्ली में साइबर अपराधों से निपटने को डी4सी का गठन।
द्वारका आइएफएसओ यूनिट और 1930 हेल्पलाइन डी4सी में विलय।
चार विशेष विंग और आधुनिक तकनीक से लैस होगा केंद्र।
संजय कुमार, बाहरी दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों पर अब दिल्ली साइबर अपराध समन्वय केंद्र (डी4सी) नकेल कसेगा। उपराज्यपाल के आदेश पर दिल्ली साइबर अपराध समन्वय केंद्र का गठन किया जा रहा है। इसमें संयुक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी तैनात होंगे और सीइओ इसकी चार मुख्य विंगों की कमान संभालेंगे। द्वारका की आइएफएसओ यूनिट और 1930 हेल्पलाइन का भी डी4सी में विलय कर दिया है।
दिल्ली में नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा
राजधानी में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों, वित्तीय धोखाधड़ी, आनलाइन ब्लैकमेलिंग और डेटा चोरी जैसे मामलों पर शिकंजा कसने के लिए दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। उपराज्यपाल के आदेश पर दिल्ली पुलिस को डी4सी की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। यह केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आइ4सी) की तर्ज पर दिल्ली में नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा।
डी4सी दिल्ली पुलिस आयुक्त के नियंत्रण में करेगा सीधा कार्य
गृह विभाग के प्रधान सचिव संतोष डी. वैद्य की अधिसूचना के अनुसार, डी4सी दिल्ली पुलिस आयुक्त के सीधे नियंत्रण में कार्य करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी में उभरते साइबर खतरों से निपटना, जांच में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और पीड़ितों को त्वरित राहत पहुंचाना है।
चार विशेष विंग के साथ हाइ-टेक होगा सिस्टम
डी4सी को चार अलग-अलग विंगों में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक की कमान पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) स्तर के अधिकारी के हाथों में होगी। इसमें प्रशासनिक विंग होगी जोकि समन्वय, बजट, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता अभियानों का प्रबंधन करेगी।
दूसरी साइबर विंग जटिल साइबर अपराधों की जांच के लिए समर्पित पुलिस स्टेशन, राज्य डिजिटल जांच सहायता केंद्र (एस-डीआइएससी) और फोरेंसिक लैब संचालित करेगी। तीसरी परिचालन (ऑपरेशन) विंग 1930 साइबर हेल्पलाइन, फ्राड मिटिगेशन सेंटर (एफएमसी), फर्जी बम ई-मेल जांच सेल और साइबर सुरक्षा प्रभाग का संचालन करेगी।
चौथी विंग महिला एवं बाल आनलाइन अपराध (ओसीडब्ल्यूसी) विंग होगी जोकि सेक्सटार्शन, एआइ जनरेटेड अश्लील सामग्री, साइबर स्टाकिंग और बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसइएएमम) जैसे संवेदनशील मामलों पर काम करेगी।
द्वारका आइएफएसओ का डी4सी में विलय
नए आदेश के तहत द्वारका स्थित मौजूदा ''इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक आपरेसन्स'' (आइएफएसओ) यूनिट को डी4सी में मिला लिया गया है। अब इसकी डिजिटल लैब, 1930 हेल्पलाइन का हैदरपुर कंट्रोल रूम और फ्राड मिटिगेशन सेंटर इस नए तंत्र का अभिन्न हिस्सा होंगे। इसके अलावा, दिल्ली के सभी 15 जिलों के साइबर थाने डी4सी के दिशा-निर्देशों पर काम करेंगे।
हाइब्रिड माॅडल और आधुनिक उपकरण करेगा अपराधियों का नेटवर्क ध्वस्त
डी4सी में पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के टेक एक्सपर्ट्स, डेटा एनालिस्ट, क्रिप्टोकरेंसी जांचकर्ताओं और मैलवेयर विशेषज्ञों को संविदा या प्रोजेक्ट बेसिस पर शामिल किया जाएगा।
इस केंद्र को मोबाइल फोरेंसिक वैन, एआई संचालित विश्लेषण उपकरण, नेटवर्क फोरेंसिक टूलकिट और फैराडे आइसोलेशन किट जैसे आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था से न केवल ठगी की गई राशि को तुरंत फ्रीज करने में तेजी आएगी, बल्कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में भी आसानी होगी।
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