दिल्ली के Fire Safety नियमों में बदलाव, NOC प्रक्रिया होगी आसान; लेकिन सुरक्षा जांच पर नजर जरूरी
दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा नियमों में बदलाव किए हैं, जो मास्टर प्लान के साथ लागू होंगे, जिसमें NOC प्रक्रिया ...और पढ़ें

दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दे सकेंगे। एआई इमेज
HighLights
दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा नियमों में किए हैं बदलाव।
NOC प्रक्रिया में थर्ड पार्टी की भूमिका बढ़ाने की तैयारी।
नियमों के पालन, निगरानी और जवाबदेही पर विशेषज्ञों का जोर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा नियमों में बदलाव किया है। ये बदलाव यूं तो दिल्ली का मास्टर प्लान लागू होने के साथ ही प्रभाव में आएंगे, लेकिन इनकी रूपरेखा स्पष्ट कर दी गई है। इसके तहत 18 श्रेणियों में विभिन्न नियम बनाए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसी इमारतें, जिनके लिए बिल्डिंग बायलाॅज के विशेष अग्नि सुरक्षा उपाय निर्धारित नहीं हैं, उनके लिए दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दे सकेंगे।
हादसों ने सामने उधेड़ी सच्चाई
ये सही है कि बड़े हादसों और उनमें जनहानि को देखते हुए दिल्ली में अग्नि सुरक्षा से संबंधित नियमों को बदला जाना व अधिक प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है, लेकिन दिल्ली ही नहीं एनसीआर के अन्य शहरों में वास्तविक परेशानी नियमों के कम प्रभावी होने से अधिक नियमों का पालन कराने में विफलता है। बीते दिनों दिल्ली समेत एनसीआर में हुई आग की बड़ी घटनाओं में भी ये सामने आया कि अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था, जिनके कारण आग लगने पर बड़ी जनहानि हुई।
उठ रहे कई सवाल
सवाल यही उठता है कि क्या दिल्ली समेत एनसीआर में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन कराने की इच्छाशक्ति, उसके लिए निगरानी और कार्रवाई की उचित व्यवस्था न होना बड़ी वजह है। क्या दिल्ली समेत एनसीआर में अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों को और प्रभावी बनाने मात्र से ही इस क्षेत्र में आग की बड़ी घटनाओं को रोकने या मौतों को कम करने में सफलता मिलेगी? इस क्षेत्र में आग की बड़ी घटनाएं रोकने और उनमें जनहानि कम हो, इसके लिए क्या किए जाने चाहिए ठोस उपाय?
दिल्ली में इस वर्ष आग की घटनाएं
- -आग लगने की घटनाएं : 9,644
- -झुलसने से मौत : 48
- -घायल : 376
- -दमकल विभाग को मिलने वाली कुल काल्स - 15,132
(आंकड़े इस वर्ष 31 जुलाई तक के)
दमकल विभाग के बेड़े में शामिल वाहन
| वाहन / उपकरण | संख्या |
|---|---|
| वाटर टेंडर | 20 |
| छोटे वाटर टेंडर | 50 |
| वाटर ब्राउसर | 66 |
| बल्क फाम टेंडर | 10 |
| ब्रोंटो स्काई लिफ्ट | 3 |
| टर्न टेबल लेडर | 1 |
| मल्टी आर्टिकुलेटिंग वाटर ब्राउजर | 6 |
| टाटा के बड़े रोबोट | 2 |
| रिकवरी वैन | 2 |
| योद्धा के छोटे रोबोट | 15 |
| मल्टी यूटिलिटी वाहन | 15 |
| योद्धा के पोर्टेबल पंप | 6 |
| छोटे डीसीपी | 6 |
| डीजल डिस्पेंसिंग यूनिट | 2 |
| क्यूआरवी | 50 |
| मोटरसाइकिल | 20 |
जिला : आग की बड़ी घटनाएं
| शहर / जिला | संख्या |
|---|---|
| गुरुग्राम | 38 |
| फरीदाबाद | 20 |
| गाजियाबाद | 44 |
| गौतमबुद्ध नगर | 17 |
- गाजियाबाद में लापरवाही से आग पर कार्रवाई : वर्ष 2026 में 35 इमारत मालिकों के खिलाफ कोर्ट में वाद दाखिल कराया गया।
- गौतमबुद्धनगर में सिर्फ एक मामले में मकान मालिक पर केस दर्ज किया।
सिर्फ नियम नहीं, सख्त निगरानी और जिम्मेदारी भी जरूरी
- राजेश चंदर शर्मा, पूर्व निदेशक दिल्ली अग्निशमन विभाग
दिल्ली सरकार ने हाल ही में अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ सुरक्षा-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। अब नियम तो बन गए, लेकिन चुनौती तो यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा मानकों की वास्तविक जांच में किसी तरह की ढिलाई न हो। सबसे अहम सवाल अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र यानी एनओसी जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
सरकार एनओसी जारी करने की प्रक्रिया में थर्ड पार्टी की भूमिका बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। साथ ही अग्निशमन विभाग की भूमिका को मुख्य रूप से आग बुझाने और आपातकालीन बचाव कार्य तक सीमित करने की बात सामने आ रही है। ऐसे में विशेषज्ञों और अग्नि सुरक्षा से जुड़े लोगों की चिंता यह है कि जिस विभाग के पास आग और बचाव से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञता है, उसे भवन की शुरुआती सुरक्षा जांच से अलग करना कितना उचित होगा।
फायर एनओसी केवल एक कागजी प्रमाणपत्र नहीं है, यह किसी भवन की वास्तविक अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच का महत्वपूर्ण माध्यम है। किसी इमारत का निरीक्षण करते समय दमकल विभाग यह देख सकता है कि वहां आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर और बचाव के लिए जरूरी अन्य व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके साथ यह भी देखा जा सकता है कि दमकल की गाड़ी आपात स्थिति में भवन तक आसानी से पहुंच पाएगी या नहीं।
एनओसी प्रक्रिया में थर्ड पार्टी को शामिल करने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने का उद्देश्य हो सकता है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। ऐसे में बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि भवन की पहली और महत्वपूर्ण अग्नि सुरक्षा जांच फायर विभाग के तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में हो। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज और अनुपालन की प्रक्रिया थर्ड पार्टी के माध्यम से पूरी की जा सकती है।
इससे दोनों व्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। साथ ही एनओसी जारी होने के बाद भी भवन की सुरक्षा व्यवस्था की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। कई बार एनओसी मिलने के बाद भवन में बदलाव कर दिए जाते हैं, अतिरिक्त निर्माण हो जाता है या सुरक्षा उपकरणों का रखरखाव बंद कर दिया जाता है। इसलिए केवल एनओसी जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नियमित निरीक्षण और उल्लंघन मिलने पर सख्त कार्रवाई की व्यवस्था जरूरी है।
अग्नि सुरक्षा के लिए कानून और नियम तभी प्रभावी होंगे, जब उनके पालन की जिम्मेदारी स्पष्ट हो। भवन मालिक, संचालक, संबंधित विभाग और निरीक्षण करने वाली एजेंसी की भूमिका तय होनी चाहिए। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। आग बुझाने की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है आग को रोकने के उपायों को मजबूत करना।
दिल्ली में हर अग्निकांड के बाद होने वाली जांच यदि केवल आग लगने के कारण तक सीमित न रहकर भवन की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, निरीक्षण प्रक्रिया और नियमों के पालन की भी समीक्षा करे, तो इससे भविष्य के हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है। अग्नि सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून और गाइडलाइंस का सख्ती से पालन, नियमित निरीक्षण और स्पष्ट जवाबदेही ही राजधानी में आग से होने वाली जनहानि को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं।

नियम बदलने से नहीं, पालन कराने से बचेगी जान
- सत्यवान सामरीवाल, सेवानिवृत्त सहायक मंडल अग्निशमन अधिकारी
दिल्ली सहित एनसीआर में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं और उनमें हुई जनहानि ने एक बार फिर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है। ऐसे समय में दिल्ली सरकार का अग्नि सुरक्षा नियमों में बदलाव करना जरूरी कदम है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या नए और सख्त नियम ही आग की घटनाओं में जनहानि कम करने के लिए पर्याप्त हैं?
दिल्ली ही नहीं, पूरे एनसीआर का अनुभव बताता है कि समस्या केवल नियमों की नहीं है, कई मामलों में नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं होता। उससे भी गंभीर स्थिति यह है कि नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं होती। यही वह गतिरोध है, जिसे दूर किए बिना नए नियम भी कागजों तक सीमित रह सकते हैं।
अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का उद्देश्य आग लगने से रोकना ही नहीं, बल्कि आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना भी है। इसके लिए भवन में पर्याप्त और चालू अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, खुले रास्ते, अलार्म सिस्टम, हाइड्रेंट और बिजली व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं जरूरी हैं। लेकिन इनकी मौजूदगी का प्रमाण केवल दस्तावेज या प्रमाणपत्र नहीं होना चाहिए।
सबसे बड़ी चुनौती बहुमंजिला इमारतों, गोदामों, औद्योगिक इकाइयों, होटल, अस्पताल, फार्महाउस, व्यावसायिक परिसरों और घनी आबादी वाली बस्तियों में है। जहां भवन का इस्तेमाल उसके स्वीकृत उपयोग से अलग तरीके से किया जा रहा हो, वहां जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में केवल भवन मालिक को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। अनुमति देने, निरीक्षण करने और उल्लंघन मिलने के बाद कार्रवाई नहीं करने वाले विभागों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह चुनौती और बड़ी है। ऊंची इमारतों और नए व्यावसायिक परिसरों के साथ शहर के कई हिस्सों में झुग्गी बस्तियां, पुराने भवन, गोदाम और अनियोजित गतिविधियां भी मौजूद हैं। इसलिए अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को केवल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता।
जोखिम के आधार पर इमारतों और क्षेत्रों की श्रेणी तय कर उनकी नियमित निगरानी जरूरी है। रेस्त्रां सहित अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता बरतने की जरूरत है। व्यवस्था में प्रत्येक संवेदनशील भवन का डिजिटल अग्नि सुरक्षा रिकाॅर्ड होना चाहिए। निरीक्षण की तारीख, कमियां, उन्हें दूर करने की समयसीमा और अगली जांच की जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो। गंभीर कमी मिलने पर केवल नोटिस जारी करने के बजाय समयबद्ध कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर भवन को सील करने की व्यवस्था हो।
घनी आबादी और संकरी गलियों वाले इलाकों में छोटी दमकल गाड़ियां, पर्याप्त जल स्रोत और स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। ऊंची इमारतों के लिए नियमित माक ड्रिल और आपातकालीन निकासी अभ्यास अनिवार्य होना चाहिए। कागज पर नियमों की संख्या बढ़ाने के बजाय जमीन पर उनका अनुपालन सुनिश्चित करना ही आग से होने वाली जनहानि रोकने का सबसे ठोस उपाय है।
(जैसा बातचीत में संदीप रतन को बताया)
