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    फायर NOC बिना चल रही थीं 43 कक्षाएं, दिल्ली सरकार ने निजी स्कूल को अधिग्रहण की दी चेतावनी

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 01:59 AM (IST)

    दिल्ली सरकार ने विकासपुरी के होली इनोसेंट पब्लिक स्कूल को अनियमितताओं के कारण अधिग्रहण की चेतावनी दी है। शिक्षा निदेशालय की जांच में फायर NOC, अवैध नि ...और पढ़ें

    होली इनोसेंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू। (AI Generated Image)

    होली इनोसेंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू। (AI Generated Image)

    HighLights

    1. 43 कक्षाएं बिना फायर NOC के संचालित हो रही थीं।

    2. स्कूल में अवैध निर्माण और फीस वृद्धि की शिकायतें मिलीं।

    3. शिक्षकों के वेतन में देरी और प्रबंधन में अनियमितताएं पाई गईं।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने विकासपुरी स्थित होली इनोसेंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) की औचक जांच में स्कूल में छात्रों की सुरक्षा, भवन निर्माण, फीस, शिक्षकों के वेतन और मान्यता से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन को सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (डीएसईए), 1973 की धारा-20 के तहत विद्यालय का सरकारी अधिग्रहण किया जाएगा। साथ ही रियायती दर पर आवंटित जमीन का पट्टा निरस्त कराने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भी सिफारिश भेजी जाएगी।

    जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि विद्यालय के पास केवल 39 कमरों के लिए अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) है, जबकि परिसर में 82 कमरों का संचालन किया जा रहा था। यानी 43 कक्षाएं बिना फायर एनओसी के संचालित हो रही थीं।

    आपातकालीन घटना में विद्यार्थियों की जान को गंभीर खतरा

    जांच टीम ने पाया कि स्कूल ने बिना अनुमति 30 कमरों का टीन शेड, अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का निर्माण भी कर रखा है। कई कक्षाओं में केवल एक ही निकास द्वार मिला, जबकि अग्निशमन वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्धारित रास्ता भी अवरुद्ध था। सरकार का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी आपातकालीन घटना में विद्यार्थियों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

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    शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अधिकारियों को विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई विद्यालय अवैध निर्माण कर, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर और कानून का उल्लंघन करते हुए हजारों विद्यार्थियों के जीवन को जोखिम में डालता है तो सरकार उसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगी, आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय का प्रबंधन भी अपने हाथ में लिया जाएगा।

    वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन जारी रखा गया

    निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि विद्यालय की वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की अस्थायी मान्यता 31 मार्च 2023 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद पिछले तीन वर्षों से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन जारी रखा गया। अधिकारियों के अनुसार इससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा परिसर में बिना किसी वैधानिक अनुमति के बोरवेल संचालित कर भूजल का दोहन किया जा रहा था, जो पर्यावरणीय नियमों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

    जांच में वित्तीय अनियमितताएं भी सामने आई हैं। आरोप है कि विद्यालय ने शिक्षा निदेशालय की अनुमति के बिना कई बार फीस बढ़ाई। कोरोना महामारी के दौरान भी 20 से 25 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई गई व स्मार्ट कक्षा शुल्क को मनमाने ढंग से दोगुना कर अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूली गई।

    रिपोर्ट में शिक्षकों के शोषण का भी उल्लेख किया गया

    निदेशालय की रिपोर्ट में शिक्षकों के शोषण का भी उल्लेख किया गया है, कई मामलों में चार-चार महीने तक वेतन लंबित रखा गया। साथ ही विद्यालय की प्रबंधन समिति में एक ही परिवार के सदस्यों का वर्चस्व पाया गया, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई। निरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी सत्यापन के लिए उपलब्ध नहीं कराए गए।

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