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दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला, पॉक्सो दोषी को सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए मिली पैरोल

Published: Sun, 21 Jun 2026 03:56 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो दोषी जसविंदर सिंह को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने के लिए चार सप्ताह की सशर्त पैरोल दी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो दोषी जसविंदर सिंह को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने के लिए चार सप्ताह की सशर्त पैरोल दी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो दोषी जसविंदर सिंह को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने के लिए चार सप्ताह की सशर्त पैरोल दी है। 

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक मामले में दोषी करार दिए गए अपीलकर्ता जसविंदर सिंह को पैरोल देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के अधिकार से वंचित न किया जाए और उसे पैरोल देने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही कोर्ट ने शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने के लिए आरोपित को चार सप्ताह के लिए सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

कानूनी सहायता से जुड़े अभियोजन पक्ष के तर्क को ठुकराते हुए अदालत ने यह भी कहा कि भले ही कैदी कानूनी सहायता वकील के जरिए एसएलपी दायर कर सकता है, लेकिन अपनी बात असरदार ढंग से रखने के लिए उसे अपना निजी वकील चुनने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि निश्चित तौर पर निजी वकील जेल जाकर याचिकाकर्ता से निर्देश ले सकता है, लेकिन कैदी और उसके वकील के बीच बातचीत के लिए जेल का विजिटर रूम सही जगह नहीं है।

अदालत ने पैरोल देने पर दोषी के भागने के संबंध में अलीगढ़ द्वारा दिए गए तर्क को भी यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इस आशंका के पीछे पुलिस कोई कारण नहीं बता सकी। दोषी मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है और अलीगढ़ पुलिस ने पैरोल देने का विरोध किया था।

अभियोजन पक्ष ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया था कि दोषी जेल के अंदर से भी कानूनी मदद लेकर एसएलपी दाखिल कर सकता है। यह भी कहा था कि दोषी का निजी अधिवक्ता जेल आकर उससे मुलाकात कर सकता है।

वहीं, दोषी ने पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले को रद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने के लिए पैरोल की मांग की थी। दो महीने के लिए पैरोल की मांग से जुड़ी उसके आवेदन को पांच दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया गया था। आरोपित के खिलाफ वर्ष 2019 में पाक्सो के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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