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    'शादी सिर्फ जमानत की चाल...' दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से बार-बार दुष्कर्म के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 06:23 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जमानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता से शादी करने से बार-बार दुष्कर्म के अपराध ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जमानत याचिका खारिज की। फाइल फोटो

    दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जमानत याचिका खारिज की। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि पीड़िता से शादी करने के आधार पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) बार-बार दुष्कर्म करने के अपराध से बरी नहीं करता है।

    शादी करने के आधार पर दुष्कर्म के मामले में जमानत की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि भले ही रिकार्ड पर मौजूद दस्तावेज के अनुसार 12 फरवरी 2026 को आरोपित ने निकाहनामे के जरिए पीड़िता से शादी कर ली थी। लेकिन, इससे बार-बार दुष्कर्म करने के कृत्य से बरी नहीं हो जाता क्योंकि पीड़िता वारदात के समय नाबालिग थी।

    पीड़िता का आरोप था कि आरोपित ने उसके साथ तब दुष्कर्म किया था जब वह महज 16 साल की थी। पीड़िता ने कहा कि आरोपित ने शादी का झूठा वादा करके उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया और गर्भवती होने पर उसे दो बार गर्भपात करवाना पड़ा।

    कोर्ट ने पाया कि उस आदमी को गिरफ़्तार करके जेल में डालने के बाद ही वह पीड़ित लड़की से शादी करने को राजी हुआ।

    अदालत ने कहा कि आरोपित ने स्पष्ट तौर पर शादी सिर्फ जमानत पाने की एक चाल के तौर पर की थी, जबकि उसने एक नाबालिग लड़की के साथ बार-बार दुष्कर्म किया था। अदालत ने कहा कि इस संबंध में पीड़िता ने प्राथमिकी में आरोप लगाया था और सीआरपीसी की धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया था।

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    हालांकि, पीड़िता ने हाई कोर्ट के समक्ष अपने बयान से पलटी मार ली थी। उसने कहा कि आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी में लिखी बातें उसे पता नहीं थीं। जांच अधिकारी ने जमानत की अर्जी का विरोध किया और इस बात पर भी जोर दिया कि पीड़ित लड़की अनपढ़ न होकर विधि छात्रा है।

    अदालत ने अभियोजन की तर्क पर सहमति जताते हुए कहा कि पीड़ित लड़की एक विधि छात्रा है और बिना पढ़े शिकायत पर हस्ताक्षर नहीं कर सकती थी। उक्त टिप्पणी के साथ अदालत ने अारोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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