सोशल मीडिया के 2 फीचर्स पर बैन की मांग, दिल्ली HC में डाली गई PIL; एक्सपर्ट से जांच कराने की भी गुहार
दिल्ली हाई कोर्ट में सोशल मीडिया ऐप्स में इनफिनिट स्क्रॉल और ऑटो-प्ले जैसे लत लगाने वाले फीचर्स के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है।

सोशल मीडिया के दो फीचर्स पर बैन लगाने की मांग। फोटो: सांकेतिक
HighLights
इंटरनेट मीडिया के इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटो-प्ले फीचर्स पर याचिका
न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने सुनवाई से खुद को अलग किया
16 सितंबर को अन्य पीठ करेगी मामले की सुनवाई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इनफिनिट स्क्रॉल और ऑटोप्ले जैसे एंगेजमेंट बढ़ाने वाले डिजाइन फीचर्स की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तेजस करिया ने मामले से खुद को अलग कर लिया। अब याचिका 16 सितंबर को अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगी।
सुनवाई से न्यायमूर्ति तेजस करिया अलग
याचिका बुधवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी। इसी दौरान न्यायमूर्ति तेजस करिया ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब मामले को 16 सितंबर को अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका में डिजाइन पर उठाए सवाल
बीएमएल मुंजल विश्वविद्यालय में विधि के प्रोफेसर याचिकाकर्ता विकास कथुरिया ने याचिका में कहा है कि मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किस तरह की सामग्री परोसी जा रही है।
उनके अनुसार, अहम पहलू यह है कि इन प्लेटफॉर्म को ही इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लगातार जोड़े रखें और उनमें लत की स्थिति पैदा करें।
याचिका में इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटोप्ले, एल्गोरिदम से तैयार और पर्सनलाइज्ड फीड तथा लगातार आने वाले नोटिफिकेशन्स का उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि इन फीचर्स का मकसद उपयोगकर्ता का ध्यान खींचना, उसे बनाए रखना और बार-बार प्लेटफॉर्म पर वापस लाना होता है।
युवाओं के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर चिंता
याचिका में कहा गया है कि भारतीय संदर्भ में यह चिंता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आंकड़ों के अनुसार 18-24 साल के भारतीय युवा हर दिन औसतन 120 मिनट से ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि क्लिनिकली यह साबित हो चुका है कि सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने का संबंध किशोरों में आत्महत्या और तनाव से है।
फीचर्स नियंत्रित करने की मांग की गई
याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट से केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें इनफिनिट स्क्रॉल, आटो-प्ले, एल्गोरिदम से तैयार फीड और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने या उन्हें प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही याचिका में इन फीचर्स को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है।
यह भी पढ़ें- BRICS Summit 2026: दिल्ली में 3 दिन के लिए 22 प्वॉइंट पर डायवर्जन और 35 सड़कें बंद, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी
