PM की विदेश यात्राओं का ब्योरा नहीं होगा पब्लिक, दिल्ली HC में CIC के आदेश को वायु सेना ने दी थी चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के CIC के आदेश को रद्द कर दिया है।

पीएम के विदेश दौराें को ब्यूरा नहीं होगा सार्वजनिक। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने CIC आदेश को रद किया।
पीएम की विदेश यात्रा रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं होंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और पीएम की सुरक्षा का हवाला।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है।
सूचना देने संबंधी केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद करते हुए न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता हो सकता है।
पीठ ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े स्पेशल फ्लाइट रिटर्न (एसएफआर) के रिकॉर्ड आरटीआई में नहीं दिए जा सकते।
राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते का खतरा
अदालत ने यह टिप्पणी और आदेश पारित करते हुए वायुसेना मुख्यालय के जन सूचना अधिकारी की याचिका को स्वीकार कर लिया। वायुसेना ने सीआईसी के आठ जुलाई 2020 के आदेश को चुनौती दी थी। सीआईसी ने अपने फैसले में वायुसेना को एसएफआर-II की जानकारी देने को कहा गया था।
पीठ ने कहा कि इस तरह के खुलासे के राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री के साथ चलने वाले सुरक्षा तंत्र पर संभावित प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन में दखल नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट या सीआईसी सुरक्षा एजेंसियों के इस आकलन पर अपील में नहीं बैठ सकते कि किसी जानकारी से राष्ट्रीय सुरक्षा या पीएम की जान को खतरा है या नहीं।
अदालत ने कहा कि यह आकलन मुख्य रूप से पीएम की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है और कोर्ट उनके आकलन को अपने आकलन से नहीं बदल सकता।
2018 में दायर हुई थी आरटीआई
यह मामला जून 2018 में सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के बत्रा द्वारा दायर आरटीआई से शुरू हुआ था। उन्होंने अप्रैल 2013 से जून 2018 के बीच आईएएफ विमानों में प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं का ब्योरा मांगा था।
इसमें एसएफआर पार्ट-एक और पार्ट-दो की जानकारी शामिल थी। इसमें विमान, एयरक्रू, पूरे प्रतिनिधिमंडल और पीएम के साथ यात्रा करने वाले सभी एसपीजी कर्मियों के नाम तक होते हैं।
वायुसेना ने कुछ यात्राओं की जानकारी तो दी, लेकिन एसएफआर की डिटेल देने से सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इनकार कर दिया।
सार्वजनिक खर्च के तर्क को नहीं माना
वहीं, सीआईसी ने आदेश दिया था कि सुरक्षा कर्मियों के नाम हटाकर एसएफआर-दो की प्रमाणित कॉपी दी जाए। इस आदेश को वायुसेना ने चुनौती दी थी।
बत्रा के वकील ने दलील दी थी कि यह जानकारी पीएम की विदेश यात्राओं पर हुए सार्वजनिक धन के खर्च से जुड़ी है, इसलिए बड़े जनहित में है।
उन्होंने कहा था कि मांग सुरक्षा कर्मियों की पहचान नहीं, बल्कि पीएम के साथ सार्वजनिक खर्च पर जाने वाले निजी व्यक्तियों से जुड़ी है।
हालांकि, पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि पीएम की विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ है, यह सुरक्षा व्यवस्था से समझौता करने वाली जानकारी के खुलासे को जायज नहीं ठहराता।
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