दिल्ली स्वास्थ्य घोटाला: पहले हुई खरीद, बाद में अस्पतालों से मांगी गई डिमांड; चहेती कंपनियों के लिए बनाए गए नियम
650 करोड़ के दिल्ली स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब अधिकारियों और कंपनियों के संबंधों पर केंद्रित है, जिसमें महंगी खरीद और किकबैक शामिल हैं। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर, एआई जनरेटेड।
HighLights
650 करोड़ दिल्ली स्वास्थ्य घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा।
पहले खरीद, फिर अस्पतालों से मांग जुटाने का खुलासा हुआ।
अधिकारियों-कंपनियों के संबंधों और वित्तीय लेनदेन की हो रही जांच।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। 650 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब केवल महंगी खरीद और किकबैक तक सीमित नहीं रह गई है। एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) की एफआईआर और उसके आधार पर बनी विजिलेंस जांच में ऐसे कई मामलों का उल्लेख है, जिनमें पहले खरीद प्रक्रिया पूरी किए जाने और बाद में अस्पतालों से मांग जुटाए जाने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि खरीद, टेंडर और भुगतान की पूरी व्यवस्था का इस्तेमाल जिन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया, उनके और निर्णय लेने वाले अधिकारियों के बीच क्या संबंध थे।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब उन कंपनियों की कॉरपोरेट संरचना, निदेशकों, साझेदारों, शेयरधारकों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं, जिन्हें विभिन्न खरीद आदेश मिले थे।
संबंधित अधिकारियों का कंपनियों में हित तलाश रहीं जांच एजेंसियां
यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं संबंधित अधिकारियों की इन कंपनियों में प्रत्यक्ष या परोक्ष हिस्सेदारी तो नहीं थी। साथ ही अधिकारियों के स्वजनों, रिश्तेदारों अथवा करीबी लोगों के इन कंपनियों से संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
एफआईआर का आधार बनी विजिलेंस जांच में कहा गया है कि कई मामलों में अस्पतालों की वास्तविक आवश्यकता और मांग से पहले ही खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। बाद में संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से मांग जुटाकर खरीद को औपचारिक आधार दिया गया।
यह पूरी प्रक्रिया सामान्य खरीद व्यवस्था से अलग थी और इसी कारण इसे जांच के केंद्र में रखा गया है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू उन टेंडरों से जुड़ा है, जिनमें प्रतिस्पर्धा बेहद सीमित रही या केवल एक ही बोलीदाता मैदान में था।
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चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गईं शर्तें
एफआईआर में दर्ज तथ्यों और जब्त दस्तावेजों के आधार पर एजेंसियां ऐसे ठेकों की फाइलें, निविदा शर्तें और मूल्यांकन प्रक्रिया की पड़ताल कर रही हैं।
आरोप है कि कुछ मामलों में तकनीकी शर्तें इस प्रकार तैयार की गईं कि प्रतिस्पर्धा स्वतः सीमित हो गई और करोड़ों रुपये के ठेके चुनिंदा कंपनियों तक पहुंच गए। इसे किसके निर्देश पर किसने किया, इसकी पड़ताल भी की जा रही है।
गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ, जब्त दस्तावेजों और डिजिटल रेकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियों का मानना है कि कंपनियों, सप्लायरों और अधिकारियों के बीच मौजूद संबंधों की परतें खुलने के साथ ही पूरे घोटाले की कार्यप्रणाली और स्पष्ट होगी।
लोकनायक के फार्मासिस्ट बिनेश कुमार निलंबित
650 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य खरीद घोटाले की जांच के बीच लोकनायक अस्पताल के फार्मासिस्ट बिनेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की विजिलेंस शाखा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सीपीए में प्रतिनियुक्ति के दौरान खरीद प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच के संदर्भ में यह कार्रवाई की गई है।
आदेश केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत जारी किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।