कैग रिपोर्ट ने खोली दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं की पोल, खर्च नहीं हो रहा पूरा बजट; डॉक्टर और दवा का अभाव
कैग रिपोर्ट 2024 ने दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोली है। दिल्ली सरकार स्वास्थ्य बजट का पूरा उपयोग नहीं कर पा रही है, जिससे मरीजों को उचित परामर् ...और पढ़ें
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दिल्ली में स्वास्थ्य का पूरा बजट भी नहीं हो पा रहा खर्च।
HighLights
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का बजट पूरा खर्च नहीं हुआ।
मोहल्ला क्लीनिक लक्ष्य से पीछे, डॉक्टर-दवा की कमी।
70% मरीजों को एक मिनट से कम परामर्श मिला।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विस्तार के लिए दिल्ली सरकार आवंटित स्वास्थ्य बजट को न तो पूरा खर्च कर कर पा रही है और न ही मरीजों को उचित परामर्श ही मिल रहा है।
दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) 2016 से 2023 के बीच दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के लिए आवंटित 35.16 करोड़ में से मात्र 9.78 करोड़, यानी कुल आवंटित बजट का 28 प्रतिशत ही खर्च कर सका। यही नहीं रिपोर्ट यह भी बताती है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों 70 प्रतिशत मरीजों को एक मिनट से भी कम का चिकित्सीय परामर्श मिल रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का यह खोखलापन सोमवार को दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट-2024 ने उजागर किया। रिपोर्ट में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक (एएएमसी) योजना की धीमी प्रगति भी सामने आई है।
रिपोर्ट बताती 1000 क्लीनिक लक्ष्य के मुकाबले मार्च 2023 तक केवल 523 ही स्थापित हो सके थे, जबकि 2020 के बाद मात्र 38 नए क्लीनिक शुरू हुए। कई क्लीनिक चिकित्सकों की कमी के कारण 15 दिन से लेकर 23 महीने तक बंद रहे। यह भी पाया गया कि 74 क्लीनिकों में आवश्यक 165 दवाओं की पूरी उपलब्धता नहीं थी और बुनियादी उपकरणों की भी कमी थी।
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अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के बीच 70 प्रतिशत मरीजों को चिकित्सक से एक मिनट से भी कम समय मिला, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। दिल्ली में मोबाइल स्वास्थ्य योजना और स्कूल स्वास्थ्य योजना भी लक्ष्य से पीछे रहीं। स्कूल स्वास्थ्य योजना के तहत 17 लाख बच्चों में से केवल 2.81 से 3.51 लाख बच्चों तक ही सेवाएं पहुंच सकीं।
इसके अलावा 150 पालीक्लिनिक स्थापित करने के लक्ष्य के सापेक्ष 2018-19 तक केवल 28 ही चालू हो सके। डिस्पेंसरी में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की भी कमी पाई गई। कैग रिपोर्ट में दवा भंडारण की खराब स्थिति भी सामने आई, जहां दवा को फर्श, शौचालय परिसर और सीढ़ियों पर रखा गया।
आयुष डिस्पेंसरी में भी बुनियादी सुविधाओं और दवाओं की कमी पाई गई, इससे वहां ओपीडी मरीजों की संख्या में कमी आई। कैग रिपोर्ट-2024 से स्पष्ट है कि दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था में योजना, क्रियान्वयन और निगरानी के स्तर पर गंभीर खामियां बनी हुई हैं।