चिराग दिल्ली के जाम से कब मिलेगी मुक्ति? HC ने PWD, DMRC और ट्रैफिक पुलिस को दिए ये निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने चिराग दिल्ली में खानपुर से ITO तक के भीषण ट्रैफिक जाम पर दिल्ली सरकार, PWD, DMRC और ट्रैफिक पुलिस को स्थायी समाधान खोजने का निर्दे ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने चिराग दिल्ली चौराहे पर लगातार ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान खोजने का निर्देश दिया है। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने चिराग दिल्ली जाम पर निर्देश दिए।
PWD, DMRC, ट्रैफिक पुलिस को स्थायी समाधान खोजने को कहा।
एक सप्ताह में बैठक कर समाधान निकालने का आदेश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और अलग-अलग एजेंसियों को चिराग दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान खोजने का निर्देश दिया है, खासकर खानपुर से ITO तक के रास्ते पर। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD), दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को इस मुद्दे को हल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि चिराग दिल्ली जैसे अहम चौराहे पर लगातार ट्रैफिक जाम से आम जनता के अधिकारों पर असर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता और वकील वकुल शर्मा ने एक याचिका दायर कर कहा कि साकेत कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट समेत कई कोर्ट इसी रास्ते से जाते हैं। इस रास्ते का इस्तेमाल बड़ी संख्या में वकील भी करते हैं। बार-बार ट्रैफिक जाम से काफी दिक्कतें होती हैं।
याचिका में कहा गया है कि खानपुर से ITO तक, खासकर चिराग दिल्ली चौराहे के पास, हर दिन भारी ट्रैफिक जाम रहता है। लगातार ट्रैफिक जाम की वजह से अक्सर कोर्ट समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिससे क्लाइंट्स के न्याय के अधिकार पर भी असर पड़ता है। सुनवाई के दौरान, स्टैंडिंग काउंसिल समीर वशिष्ठ ने कोर्ट को बताया कि चिराग दिल्ली चौराहे पर ट्रैफिक जाम का एक बड़ा कारण दिल्ली मेट्रो से जुड़ा चल रहा कंस्ट्रक्शन का काम है।
उन्होंने यह भी कहा कि DMRC को सीधे तौर पर इस याचिका में पार्टी नहीं बनाया गया था। कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए DMRC को मामले में पार्टी बनाया और PWD, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और DMRC को मिलकर समाधान निकालने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि DMRC और ट्रैफिक पुलिस को ट्रैफिक जाम का व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए एक हफ्ते के अंदर मीटिंग करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी याचिकाकर्ता को दी जाए।