NDPS मामले में जमानत देते हुए दिल्ली HC ने लगाई पुलिस को फटकार, कहा- सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, मुकदमे की भी जिम्मेदारी
दिल्ली हाई कोर्ट ने ड्रग तस्करी के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए दिल्ली पुलिस की लापरवाही पर ...और पढ़ें

दिल्ली HC ने पुलिस की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाया। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए।
ड्रग तस्करी के आरोपी को जमानत दी गई।
त्वरित सुनवाई के अधिकार पर जोर दिया गया।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। ड्रग तस्करी के मामले में वर्ष 2023 से जेल में बंद आरोपित को जमानत देते हुए एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाया है। दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि पूर्व के तमाम आदेश के बावजूद भी पुलिस के रवैये में सुधार नहीं हो रहा है।
पीठ ने कहा कि पुलिस की भूमिका सिर्फ किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करके जेल में डाल देना नहीं है, बल्कि उस पर मुकदमा चलाने की भी परवाह करना है। पीठ ने कहा कि अदालत में पेश हुए अधिकारियों को ये भी जानकारी नहीं है कि मामले की जांच कर रहे अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद जांच किसे सौंपी गई है। उक्त टिप्पणी के साथ पीठ ने इस आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को भेजने का आदेश दिया, ताकि आरोपित की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा।
जमानत याचिका स्वीकार करते हुए की टिप्पणी
अदालत ने उक्त निर्देश व टिप्पणियां आरोपित रिफत अली उर्फ दानिश की नियमित जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए की। मामले पर सुनवाई करते हुए पीठ ने रिकार्ड पर लिया कि अदालत के समक्ष पेश हुए दो सब-इंस्पेक्टर में से किसी को भी यह जानकारी नहीं था कि पिछले जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद इस मामले की जांच किसे सौंपी गई है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष को भी ट्रायल की कार्यवाही की स्थिति के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी।
अदालत ने नोट किया कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि छह गवाहों की जांच की जा चुकी है, जबकि आरोपित ने ट्रायल कोर्ट की आर्डरशीट का हवाला देते हुए यह दिखाया कि केवल चार गवाहों की ही पूरी तरह से जांच हुई है और पांचवें गवाह की जांच केवल आंशिक रूप से हुई है।
NDPS की धारा 37 की कठोरताओं पर पड़ सकता है भारी
उक्त तथ्यों और आरोपित के 18 जुलाई 2023 से हिरासत में होने के पहलू को देखते हुए अदालत ने कहा कि ट्रायल द्वारा उचित समय सीमा के भीतर मामले पर सुनवाई पूरा करने की संभावना नहीं है। पीठ ने कहा कि ऐसे में संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत त्वरित ट्रायल का अधिकार, एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरताओं पर भारी पड़ सकता है।
पीठ ने इसके साथ ही आराेपित की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे 10,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही रकम की एक जमानती पर रिहा करने का निर्देश दिया।
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