दीवाली पर पटाखों से जलने और झुलसने वालों के लिए दिल्ली के अस्पतालों में विशेष तैयारी, बरतें ये सावधानी
दिल्ली के प्रमुख अस्पताल दीवाली पर पटाखों और दीयों से जलने-झुलसने की घटनाओं से निपटने के लिए आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था ...और पढ़ें
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अस्पतालों में विशेष तैयारी। AI जनरेटेड इमेज
HighLights
दिल्ली के अस्पताल दीपावली पर जलने के मामलों हेतु तैयार।
सफदरजंग अस्पताल में सबसे बड़ी बर्न यूनिट सक्रिय।
पिछले साल 325 मरीज जलने की चोटों के साथ पहुंचे।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दीवाली पर पटाखों और दीयों से जलने-झुलसने की घटनाओं को देखते हुए दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों ने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।
सफदरजंग अस्पताल, एम्स, लोकनायक अस्पताल, जीटीबी और दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में जलने के मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
आपातकालीन विभागों में अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता, दवाओं और ड्रेसिंग सामग्री के भंडार तथा गंभीर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति
इस बार दीवाली पर पटाखे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीमित छूट दी है। सात और आठ नवंबर को सुबह छह से सात बजे तथा रात आठ से दस बजे तक केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई है। अस्पतालों के 300 मीटर के दायरे में यह छूट नहीं है।
बावजूद इसके अस्पतालों को आशंका है कि पटाखों के साथ दीयों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से जलने के मामले सामने आ सकते हैं। सफदरजंग में सबसे अधिक मरीज आने की आशंका सफदरजंग अस्पताल में देश की सबसे बड़ी बर्न यूनिट है। यहां जलने के गंभीर और सामान्य दोनों तरह के मरीज पहुंचते हैं।
अस्पताल में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग-अलग उपचार व्यवस्था के साथ आपातकालीन ट्राली, ड्रेसिंग सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता रहेगी।
एम्स में बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के साथ आइसीयू और आपरेशन थिएटर को तैयार रखा गया है। लोकनायक अस्पताल और जीटीबी अस्पताल में भी बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग को सतर्क रखा गया है। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भी पूरी तैयारी है।
पिछले साल 325 मरीज पहुंचे थे अस्पताल
पिछले साल दीवाली और उससे पहले के दिन दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में 325 लोग जलने की चोटों के साथ पहुंचे थे। इनमें करीब 270 मामले पटाखों से संबंधित थे। सफदरजंग अस्पताल में सर्वाधिक 129 मरीज पहुंचे थे। इनमें 18 गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ा था।
एम्स में 55 मरीज पहुंचे थे और गंभीर रूप से झुलसे 10 मरीजों को आइसीयू में भर्ती किया गया था। जीटीबी में 37, दीनदयाल उपाध्याय में 16 और लोकनायक अस्पताल में 15 मरीज पहुंचे थे।
जलने पर तुरंत करें ये उपाय
चिकित्सकों के अनुसार, जलने पर प्रभावित हिस्से को तुरंत 15 से 20 मिनट तक सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे रखना चाहिए। उस पर घी, तेल, टूथपेस्ट या अन्य घरेलू चीजें नहीं लगानी चाहिए। गंभीर रूप से जलने, चेहरे या आंखों के आसपास चोट लगने और बच्चों के झुलसने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए।
बरतें यह सावधानी
- पटाखे जलाते समय जूते पहनें और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मे का इस्तेमाल करें।
- पटाखे जलाने के लिए लंबी मोमबत्ती या अगरबत्ती का इस्तेमाल करें, हाथ में पकड़कर पटाखे न जलाएं।
- पटाखा न जलने पर उसके पास तुरंत न जाएं और दोबारा जलाने की कोशिश न करें।
- रॉकेट और अनार जैसे पटाखों को खुले स्थान पर समतल जमीन पर रखें।
- पटाखे जलाते समय पानी की बाल्टी और रेत पास रखें।
- घर के अंदर, बालकनी या बंद स्थान पर पटाखे न जलाएं।
- ज्वलनशील पदार्थों, पेट्रोल, गैस सिलेंडर और बिजली के तारों के पास पटाखे न जलाएं।
- आंखों और हाथों को पटाखों की चिंगारी से बचाएं तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
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