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जासूसी के नए तरीके ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता, भारतीय नंबर बन रहे ISI नेटवर्क का 'गेटवे'

Updated: Sat, 29 Aug 2026 09:40 AM (IST)

दिल्ली में ISI के जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें सराय काले खां से एक दंपती मोहम्मद साहिल और ...और पढ़ें

सराय काले खां से जासूसी नेटवर्क के आरोप में गिरफ्तार किए गए दंपती मोहम्मद साहिल और समीरा से की गई जांच में भी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से संपर्क बढ़ाए जाने की बात सामने आई है।

सराय काले खां से जासूसी नेटवर्क के आरोप में गिरफ्तार किए गए दंपती मोहम्मद साहिल और समीरा से की गई जांच में भी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से संपर्क बढ़ाए जाने की बात सामने आई है।

HighLights

  1. दिल्ली में ISI जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दंपती गिरफ्तार।

  2. सराय काले खां से मोहम्मद साहिल और समीरा पकड़े गए।

  3. भारतीय नंबरों से इंटरनेट मीडिया पर जासूसी का नया तरीका।

मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। जासूसी के तौर-तरीकों में तेजी से बदलाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रहा है। अब जासूसों के लिए जरूरी नहीं कि वे किसी संवेदनशील इलाके में जाकर सीधे संपर्क स्थापित करें।

इंटरनेट मीडिया के जरिए घर बैठे किसी व्यक्ति से दोस्ती करना और धीरे-धीरे उसे अपने प्रभाव में लेना भी जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

 

धीरे-धीरे बढ़ने लगती है रुचि

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ऐसे मामलों में शुरुआत में बातचीत पूरी तरह सामान्य दिखाई देती है। सामने वाला व्यक्ति दोस्ती, रोजगार, आर्थिक मदद या किसी साझा रुचि के बहाने संपर्क बढ़ा सकता है। कुछ समय तक बातचीत के जरिए विश्वास कायम करने के बाद धीरे-धीरे ऐसे अनुरोध किए जा सकते हैं, जिनका संबंध संवेदनशील सूचनाओं या गतिविधियों से हो।

भारतीय नंबर बना 'गेटवे'

दंपती की गिरफ्तारी के बाद जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स ने इन इंडियन मोबाइल नंबरों की मदद से कुछ भारतीय वाट्सऐप ग्रुप्स में एंट्री लेने की कोशिश की। इन ग्रुप्स में शामिल लोगों से संपर्क बढ़ाना और ग्रुप में साझा होने वाली जानकारी को हासिल करना नेटवर्क का मकसद बताया जा रहा है।

भारतीय नंबर होने के कारण सामने वाले व्यक्ति को इस बात का अंदाजा नहीं होता था कि दूसरी तरफ से चैट करने वाला व्यक्ति पाकिस्तान में बैठा हो सकता है। इस तरह मोबाइल नंबर नेटवर्क के लिए एक तरह का 'गेटवे' बन गए।

नोएडा में काॅल सेंटर में नौकरी करती थी समीरा

गिरफ्तार साहिल का जन्म 2001 में हुआ था। इग्नू से बीए करने के बाद उसने एलएलबी करने की योजना बनाते हुए एक वकील के साथ काम करना शुरू किया। बीते वर्ष जून उसने नौकरी छोड़ दी और तब से वह बेरोजगार है।

उसके पिता मोहम्मद असफाक 1982 में अपने गृहनगर बदायूं से दिल्ली आ गए थे और दिल्ली के सराय काले खां में बस गए, जहां वे कार मैकेनिक का काम करते हैं। वहीं समीरा का जन्म 2005 में हुआ था। दिल्ली से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उसने पत्राचार से बीए किया।

गिरफ्तारी से पहले, वह नोएडा के एक काल सेंटर में काम करती थी। उसके पिता नदीम 1996 में अपने गृहनगर बिजनौर से दिल्ली आए और शकूरपुर में बस गए। वे शकूरपुर के स्थानीय बाजारों में कोल्ड ड्रिंक्स और पानी की बोतलें सप्लाई करते हैं।

डिजिटल पहचान की जांच बनी चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इंटरनेट मीडिया पर इस्तेमाल की जा रही पहचान वास्तविक है या नहीं, इसका पता लगाना आसान नहीं होता। फर्जी नाम, तस्वीर और प्रोफाइल के जरिए लंबे समय तक किसी व्यक्ति से संपर्क बनाए रखा जा सकता है।

बातचीत आगे बढ़ने पर मोबाइल फोन, मैसेजिंग एप और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जांच का अहम हिस्सा बन जाते हैं।

जांच एजेंसियों की नजर में किसी संवेदनशील स्थान की तस्वीर, आवाजाही की जानकारी, किसी अधिकारी या संस्थान से जुड़ी सामान्य दिखने वाली सूचना भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी कारण डिजिटल फाेरेंसिक अब जासूसी मामलों की जांच में अहम भूमिका निभा रहा है।

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