NCR में खत्म होगी ट्रैफिक की टेंशन! 4 हाई-स्पीड लिंक और 6 नए RRTS कॉरिडोर्स से आसान होगा सफर; समझें Master Plan 2047
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए चार हाई-स्पीड सड़क लिंक और छह नए आरआरटीएस कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इनका उद्देश्य एनसीआर में तेज व सुगम परिवहन उपलब्ध कराना है।

मास्टर प्लान में दिल्ली एनसीआर की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
4 हाई-स्पीड लिंक दिल्ली को एनसीआर से जोड़ेंगे
6 नए RRTS कॉरिडोर परिवहन मजबूत करेंगे
IGI और नोएडा एयरपोर्ट के बीच सीधा सड़क संपर्क
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में राजधानी को आसपास के शहरों से तेज और सुगम परिवहन नेटवर्क से जोड़ने पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 4 हाई-स्पीड लिंक कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं।
ये कॉरिडोर दिल्ली को बागपत, लोनी, गाजियाबाद, गुरुग्राम, झज्जर और जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ेंगे। इनका उद्देश्य दिल्ली में अंतरराज्यीय ट्रैफिक को कम कराना और एनसीआर में तेज आवागमन उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए 6 नए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है।
यानी दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में सड़क आधारित चार हाई-स्पीड लिंक और सार्वजनिक परिवहन आधारित छह आरआरटीएस कॉरिडोर, दोनों अलग-अलग प्रस्ताव हैं। उपलब्ध विवरण में छह आरआरटीएस कॉरिडोर के नाम नहीं दिए गए हैं।

बागपत-लोनी से दिल्ली तक नया रोड लिंक
- 4 हाई-स्पीड सड़क लिंक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव अर्बन एक्सटेंशन रोड-1 (यूईआर-1) को एनएच-1/जीटी रोड से आगे गाजियाबाद-लोनी-बागपत एक्सप्रेसवे की दिशा में जोड़ने का है।
- इससे सोनीपत, नरेला और बवाना की ओर से आने वाले वाहनों को गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचने के लिए दिल्ली के व्यस्त हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है।
- इस लिंक का व्यापक उद्देश्य एनसीआर के शहरों को रिंग रोड और लिंक कॉरिडोर के नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि क्षेत्रीय यातायात को दिल्ली के सबसे व्यस्त हिस्सों में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकें।
दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट की रोड कनेक्टिविटी
- दूसरा प्रमुख प्रस्ताव यूईआर-2 को एनएच-8 और द्वारका क्षेत्र से आगे ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तथा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर की दिशा में जोड़ने का है। इससे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और जेवर एयरपोर्ट के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।
- जेवर एयरपोर्ट के विस्तार और वहां यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ यह कनेक्टिविटी दिल्ली-एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे दिल्ली, गुरुग्राम, द्वारका, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ओर से दोनों हवाई अड्डों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होंगे।
- यूईआर-2 के आसपास उच्च घनत्व वाले विकास का प्रावधान भी मास्टर प्लान में किया गया है, जिससे यह सिर्फ परिवहन मार्ग ही नहीं बल्कि भविष्य के शहरी विस्तार का महत्वपूर्ण आधार भी बन सकता है।
द्वारका से गुरुग्राम के बीच नई हाई स्पीड रोड
- तीसरे प्रस्ताव में द्वारका सेक्टर-21 से गुरुग्राम के हुडा सिटी सेंटर तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी विकसित करने की बात है। यह मार्ग दिल्ली और गुरुग्राम के बीच एक अतिरिक्त तेज सड़क संपर्क उपलब्ध करा सकता है।
- इससे एनएच-48 और द्वारका एक्सप्रेसवे पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। द्वारका सेक्टर-21 पहले से ही दिल्ली के महत्वपूर्ण परिवहन केंद्रों में शामिल है, इसलिए इसे गुरुग्राम से बेहतर तरीके से जोड़ने से पश्चिमी दिल्ली और गुरुग्राम के बीच आवागमन को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।
द्वारका से झज्जर तक बेहद आसान होगी पहुंच
- चौथा हाई-स्पीड लिंक द्वारका से झज्जर की दिशा में प्रस्तावित है। इससे पश्चिमी दिल्ली का हरियाणा के झज्जर क्षेत्र से संपर्क बेहतर होगा। इस मार्ग से झज्जर स्थित एम्स क्षेत्र को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है, जो स्वास्थ्य और शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
- इस तरह चारों सड़क लिंक दिल्ली को एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ने के साथ-साथ राजधानी के अंदर आने वाले बाहरी यातायात को वैकल्पिक मार्ग देने की दिशा में काम करेंगे।
रिंग रोड और लिंक कॉरिडोर से घटेगा दबाव
एमपीडी-2047 की परिवहन रणनीति का एक बड़ा उद्देश्य पड़ोसी राज्यों से आने वाले यातायात को दिल्ली के भीतरी और भीड़भाड़ वाले हिस्सों में प्रवेश करने से रोकना है। इसके लिए रिंग रोड और लिंक कॉरिडोर का नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया है।
इन वैकल्पिक मार्गों के बनने से इनर और आउटर रिंग रोड, सिग्नेचर ब्रिज और वजीराबाद ब्रिज जैसे प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने की कोशिश होगी। खासतौर पर यमुना के दोनों ओर स्थित क्षेत्रों के बीच आवाजाही को सुगम बनाने में इन लिंक कॉरिडोर की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
मास्टर प्लान में दिल्ली और नोएडा तथा गाजियाबाद जैसे पड़ोसी शहरों के बीच आने-जाने वाले यातायात के लिए कंजेशन चार्ज का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करना और वैकल्पिक परिवहन साधनों को बढ़ावा देना है।

सड़क के साथ RRTS का भी होगा एक्सटेंशन
सड़क नेटवर्क के समानांतर मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए छह नए आरआरटीएस कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। आरआरटीएस का उद्देश्य दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख क्षेत्रीय केंद्रों के बीच तेज सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
- मास्टर प्लान के अनुसार दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मेट्रो, बसों और आरआरटीएस के विस्तार के जरिए मजबूत किया जाएगा। दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क को भी 2047 तक करीब 695 किलोमीटर तक विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है।
- आरआरटीएस, मेट्रो और अन्य परिवहन साधनों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए दिल्ली में आनंद विहार-कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन-सराय काले खां में मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
- इन केंद्रों पर यात्रियों को मेट्रो, रेल, बस और आरआरटीएस जैसी अलग-अलग परिवहन सेवाओं के बीच बेहतर इंटरचेंज सुविधा देने की योजना है।
दो स्तरों पर बदलेगा दिल्ली-NCR का परिवहन नेटवर्क
एमपीडी-2047 में प्रस्तावित परिवहन ढांचे को दो स्तरों पर देखा जा सकता है। चार हाई-स्पीड लिंक कॉरिडोर मुख्य रूप से सड़क मार्ग से दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों के बीच तेज संपर्क उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं, जबकि छह नए आरआरटीएस कॉरिडोर क्षेत्रीय सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करेंगे।
इसका व्यापक लक्ष्य दिल्ली को एक ऐसे परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है, जिसमें एनसीआर के शहरों के बीच जाने वाला यातायात दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले हिस्सों पर निर्भर न रहे और लोगों को सड़क तथा तेज सार्वजनिक परिवहन दोनों के विकल्प उपलब्ध हों।
2047 तक दिल्ली की अनुमानित 3.2 करोड़ आबादी की जरूरतों को देखते हुए परिवहन नेटवर्क का यह विस्तार मास्टर प्लान के प्रमुख आधारों में शामिल है।
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