दिल्ली की 1511 कॉलोनियों में होगा बड़ा बदलाव, मास्टर प्लान-2047 से नियमों के दायरे में आएंगे PG-होटल और दुकान
मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली की नियमित अनधिकृत कॉलोनियों के नियोजित विकास पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित कर शहरी क्षेत्रों को बेहतर बनाया जाएगा।

नियमित हुईं अनाधिकृत काॅलोनियों में होगा विकास। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
मास्टर प्लान-2047 में पहली बार टाउन प्लानिंग का प्रावधान
कॉलोनियों में आवासीय-व्यावसायिक गतिविधियों का होगा नियोजन
पूरे इलाके को इकाई मानकर होगा व्यवस्थित विकास
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली की अनियोजित कॉलोनियों में अब केवल सड़क, सीवर और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर ही जोर नहीं होगा बल्कि मास्टर प्लान-2047 में पहली बार टाउन प्लानिंग को शामिल किया गया है।
इसके जरिए नियमित हो चुकी अनधिकृत कॉलोनियों के बेतरतीब विकास को व्यवस्थित करने की तैयारी है। इसका फोकस आवासीय इलाकों के बीच विकसित हो चुकी दुकानों, छोटे कार्यालयों, पीजी, हास्टल, होटल, प्ले स्कूल, क्लीनिक और अन्य गतिविधियों को पूरे क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार नियोजित करना होगा।
पूरी कॉलोनी को इकाई मानकर बनेगी योजना
दिल्ली की कई अनियोजित कॉलोनियों में समय के साथ आवासीय मकानों के बीच विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इनमें से कई स्थानीय जरूरत के लिहाज से जरूरी हैं, लेकिन इनके बढ़ने के साथ पार्किंग, यातायात, सार्वजनिक स्थान और आसपास की सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ा है।
डीडीए अधिकारियों के अनुसार, टाउन प्लानिंग का मतलब केवल किसी एक मकान या प्लाट का इस्तेमाल बदलना नहीं होगा। इसके तहत पूरी कॉलोनी या क्षेत्र को एक इकाई मानकर देखा जाएगा।
योजना के दौरान यह तय करने की दिशा में काम होगा कि कहां आवासीय गतिविधियां रहें, किन स्थानों पर बाजार या दूसरी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं और यातायात, पार्किंग व सार्वजनिक सुविधाओं के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।
1511 नियमित कॉलोनियों के विकास की तैयारी
मास्टर प्लान-2047 में टाउन प्लानिंग को शामिल करने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि केंद्र सरकार की पीएम उदय योजना के तहत 1511 अनधिकृत कॉलोनियां नियमित की जा चुकी हैं।
अब इन इलाकों को केवल नियमित दर्जा देने के बजाय उनके विकास और सुधार के अगले चरण पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, टाउन प्लानिंग के जरिए इन कॉलोनियों के भविष्य के विकास को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश होगी।
पार्किंग और सार्वजनिक स्थान निकालना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, यह काम आसान नहीं होगा। ज्यादातर कालोनियां पहले से ही घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विकसित हो चुकी हैं। ऐसे में मौजूदा निर्माण के बीच भू-उपयोग को व्यवस्थित करना, पार्किंग और सार्वजनिक स्थान के लिए जगह निकालना तथा व्यावसायिक गतिविधियों को उचित स्थान देना बड़ी चुनौती होगी।
इसके लिए स्थानीय निवासियों और संपत्ति मालिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जल्द शुरू हो सकता है नियोजित विकास का काम
डीडीए अधिकारियों के अनुसार, टाउन प्लानिंग के तहत इन क्षेत्रों के नियोजित विकास की दिशा में जल्द काम शुरू किया जा सकता है। हालांकि, इसका असर धरातल पर दिखाई देने में समय लगेगा।
मास्टर प्लान-2047 में पहली बार टाउन प्लानिंग को जगह मिलने के बाद नियमितीकरण से आगे अब चुनौती इन कॉलोनियों को केवल वैध दर्जा देने तक सीमित नहीं रहेगी। लक्ष्य उन्हें अधिक व्यवस्थित, बेहतर नियोजित और रहने योग्य शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करना होगा।
क्या बदलेगा टाउन प्लानिंग से?
- मिश्रित इस्तेमाल का नियोजन: घरों के बीच दुकान, पीजी, हास्टल, प्ले स्कूल और क्लीनिक जैसी गतिविधियों को इलाके की जरूरत के हिसाब से व्यवस्थित करने की कोशिश।
- पूरे इलाके पर नजर: किसी एक प्लाट के बजाय पूरी कॉलोनी को इकाई मानकर भू-उपयोग, यातायात, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधाओं की योजना।
- बेतरतीब विकास पर रोक: भविष्य में होने वाले निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को पहले से तय योजना के अनुरूप विकसित करने की कोशिश।
- नियमितीकरण से आगे: कॉलोनी को सिर्फ वैध दर्जा देने के बजाय उसे बेहतर नियोजित और रहने योग्य शहरी क्षेत्र में बदलने पर जोर।
