दिल्ली में एक साल की कानूनी लड़ाई रंग लाई, नारायणा के फुटपाथ से हटाया गया कूड़ा घर; PWD ने की कार्रवाई
नारायणा गांव के लोगों की एक साल की कानूनी लड़ाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर फुटपाथ से ...और पढ़ें

हाई कोर्ट के आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा तोड़े गए कूड़ा घर का मलबा हटाते मजदूर। जागरण
HighLights
नारायणा फुटपाथ से एक साल बाद हटा कूड़ा घर।
दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े आदेश के बाद हुई कार्रवाई।
स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने राहत की सांस ली।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। फुटपाथ पर पैदल चलने के अधिकार के लिए नारायणा गांव के लोगों की करीब एक साल चली कानूनी लड़ाई आखिरकार रंग लाई।
रिंग रोड पर बीआरओ मुख्यालय के सामने और नारायणा फ्लाईओवर के पिलर नंबर-1 के पास फुटपाथ पर करीब एक वर्ष पहले बनाया गया कूड़ा घर (ढलाव) अब हटा दिया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े रुख और आदेश के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ढलाव की दीवारों को ढहा दिया। कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने राहत और खुशी जताई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक फुटपाथ पर ढलाव बनाए जाने के बाद यहां कूड़ा डालने के साथ कचरा उठाने वाली गाड़ियां भी खड़ी होती थीं। इससे पैदल राहगीरों के लिए फुटपाथ का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया था।
लोगों ने इस समस्या को लेकर कई बार पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और दिल्ली सरकार से शिकायत की। इसके बावजूद जब महीनों तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया।
सेंटर फार यूथ कल्चर ला एंड एनवायरमेंट के माध्यम से पारस त्यागी और आदित्य तवर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फुटपाथ से ढलाव हटाने की मांग की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने की।
19 अगस्त को जारी आदेश में पीठ ने 27 मार्च को विभिन्न एजेंसियों की बैठक में लिए गए निर्णयों का हवाला दिया। बैठक में फुटपाथ पर बने ढलाव को ध्वस्त करने और इसे नारायणा फ्लाईओवर के पास फुटपाथ से दूर वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था।
इसके लिए 3.50 मीटर गुणा 3.00 मीटर के एक कमरे वाले स्थान का प्रस्ताव था। अदालत ने पीडब्ल्यूडी और दिल्ली कैंट बोर्ड को निर्देश दिया कि 27 मार्च के निर्णयों को तत्काल लागू किया जाए।
साथ ही चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर ठोस कारण बताने होंगे और अदालत को सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा। दोनों एजेंसियों से दो सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी गई थी।
HC के आदेश के बाद हरकत में आया पीडब्ल्यूडी
हाई कोर्ट के आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी हरकत में आया और दो सितंबर की समयसीमा से पहले ही फुटपाथ पर बने कूड़ा घर की दीवारों को पूरी तरह ढहा दिया। ढलाव हटने के बाद फुटपाथ फिर से पैदल राहगीरों के लिए खुल गया।
ढलाव हटने पर स्थानीय लोगों ने राहत जताई, लेकिन सरकारी तंत्र के रवैये पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि यदि विभाग और दिल्ली सरकार ने समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की होती तो लोगों को एक साल तक कानूनी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ती।
लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ से कूड़ा घर हटाने जैसी छोटी समस्या का समाधान प्रशासन स्तर पर हो सकता है तो इसके लिए नागरिकों को अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़े।
क्या बोले लोग
फुटपाथ आम नागरिकों के चलने के लिए है, कूड़ा डालने के लिए नहीं। जब प्रशासनिक तंत्र सो जाता है, तब अदालत ही एकमात्र सहारा बनती है।
- पारस त्यागी, याचिकाकर्ता
जनहित के लिए हमारी लंबी लड़ाई रंग लाई है। हाई कोर्ट के आदेश ने साबित किया कि नागरिकों के बुनियादी अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।
- आदित्य तंवर , याचिकाकर्तायह भी पढ़ें- मुजफ्फरपुर में फुटपाथ पर सामान, आधी सड़क पर ठेला, आखिर पैदल चलें भी तो कहां
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