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    दुबई से भारत में चलाया जा रहा था इनवेस्टमेंट के नाम पर ठगी का रैकेट, दिल्ली पुलिस ने गोवा से दबोचा ठग

    By Agency PTIEdited By: Neeraj Tiwari
    Updated: Sat, 14 Feb 2026 06:39 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय निवेश धोखाधड़ी सिंडिकेट के सदस्य रौनक ठक्कर को गोवा से गिरफ्तार किया है। वह दुबई से संचालित गिरोह के लिए भारत में म्य ...और पढ़ें

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    पीटीआई, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय निवेश धोखाधड़ी सिंडिकेट के सदस्य को गिरफ्तार किया है। वह दुबई में बैठकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने का कार्य करता था।

    आरोपी की गिरफ्तारी

    आरोपी की पहचान रौनक जगदीश भाई ठक्कर के रूप में हुई है। उसे 5 फरवरी को गोवा के मोपा हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया। ठक्कर 2024 में क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में वांछित था।

    धोखाधड़ी का मामला कैसे सामने आया

    पुलिस के अनुसार, यह मामला राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के एक निवासी की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे एम/एस ग्लोब कैपिटल मार्केट लिमिटेड के प्रतिनिधि बताकर धोखे से 61.72 लाख रुपये ठगे गए।

    फ्रॉडस्टर्स ने पीड़ित को एक ग्रुप में जोड़ा और फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश के लिए उकसाया। जब पीड़ित निवेश की गई राशि निकाल नहीं पाया तो उसे एप्लिकेशन फर्जी होने का पता चला। ठगी का पता चलते ही उसने पुलिस से संपर्क किया।

    जांच के प्रमुख खुलासे

    जांच में पता चला कि निवेश की गई रकम गुजरात के जूनागढ़ स्थित महादेव एंटरप्राइजेज और कश्मीर के श्रीनगर स्थित न्यू सादिकीन जैसी शेल कंपनियों से जुड़े बैंक खातों में गई। इसके बाद धनराशि कई राज्यों में फैले म्यूल खातों में ट्रांसफर की गई। इनमें मुंबई और सूरत से जुड़े खाते भी शामिल थे।

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    डिप्टी कमिश्नर (क्राइम) आदित्य गौतम के अनुसार, यह एक सुनियोजित अंतरराज्यीय नेटवर्क था जिसमें शेल कंपनियां, जाली एमएसएमई दस्तावेज, फर्जी रबर स्टैंप और धोखाधड़ी से प्राप्त सिम कार्ड शामिल थे, जिनका इस्तेमाल वैध वित्तीय संस्थानों की नकल करने के लिए किया जाता था।

    अब तक की कार्रवाई

    • इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
    • इनके पास से 81 सिम कार्ड, 24 मोबाइल फोन, जाली स्टैंप, एमएसएमई दस्तावेज, चेक बुक, सीपीयू और अन्य डिजिटल सबूत।
    • जांच में अहमदाबाद से एक ही पीओएस विक्रेता के माध्यम से जारी सिम कार्डों के दुरुपयोग का खुलासा हुआ।
    • इस सुराग पर मुंबई, सूरत और अहमदाबाद में एक साथ छापेमारी की गई, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां हुईं।

    सिंडिकेट ऐसे करता था जालसाजी

    • सिंडिकेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए पीड़ितों को निशाना बनाता था।
    • उच्च रिटर्न और वीआईपी स्टॉक टिप्स का लालच देकर उन्हें फर्जी ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहां प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों की नकल वाले ग्रुप बनाए जाते थे।
    • फर्जी सफलता की कहानियां साझा कर विश्वास बनाया जाता था।
    • इसके बाद पीड़ितों को फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाया जाता था।
    • निवेश की राशि शेल कंपनियों और म्यूल खातों के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी या हवाला चैनलों के जरिए कथित तौर पर विदेश भेजी जाती थी।

    ठक्कर की भूमिका

    पुलिस के अनुसार, रौनक ठक्कर दुबई से काम कर रहा था और सिंडिकेट के मास्टरमाइंड कृष हस्मुख भाई शाह के लिए भारत में म्यूल बैंक खाते कमीशन पर व्यवस्थित करता था। कृष हस्मुख भाई शाह को इस मामले में घोषित अपराधी (प्रॉक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित किया जा चुका है। अतिरिक्त सहयोगियों, धन के रास्तों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

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