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मार्च से धरना, हिरासत और रिहाई तक... राहुल-प्रियंका समेत कई विपक्षी नेता रिहा; प्रोटेस्ट में क्या-क्या हुआ?

By AgencyEdited By: Sonu Suman
Published: Tue, 06 Oct 2026 08:11 PM (IST)Updated: Tue, 06 Oct 2026 10:07 PM (IST)

दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन में धरना दे रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं को हटा ...और पढ़ें

HighLights

  1. पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को धरने से हटाया।

  2. कांग्रेस नेता चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने जा रहे थे।

  3. अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया।

एएनआई, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका समेत तमाम कांग्रेसी नेताओं को रिहा कर दिया। पुलिस आकाशवाणी भवन से डिटेन किए गए नेताओं को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन ले गई थी। सभी नेता वहां भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे।

इससे पहले, बीते 9 घंटे से आकाशवाणी भवन परिसर में धरना दे रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम कांग्रेस के नेताओं हटा दिया था। दरअसल, संसद मार्ग से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था। इसके बाद वह आकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठ गए थे।

प्रदर्शन में राहुल-प्रियंका के अलावा केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी और अमरिंदर राजा वडिंग आदि नेता मौजूद थे। सभी नेता दिनभर आकाशवाणी भवन में ही डटे रहे। पुलिस सभी को मनाती रही, लेकिन कोई भी हटने को तैयार नहीं था। बाद में पुलिस सभी को जबरन वहां से हटा दिया।

कई विपक्षी नेता पहले ही किए गए थे डिटेन

इससे पहले पुलिस ने अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन समेत कई सांसदों को हिरासत में लेकर बसों में बिठा लिया था। परिसर के अंदर भी पुलिस अधिकारियों ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं से जगह खाली करने को कहा। डीसीपी सचिन शर्मा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और नेताओं को मनाने की कोशिश की।

राहुल गांधी ने हटाए जाने का किया विरोध

राहुल गांधी ने पुलिस की हिरासत और हटाने के प्रयासों का विरोध किया। वे प्रियंका गांधी के साथ आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए थे और चुनाव आयोग कार्यालय तक जाने की जिद पर अड़े रहे।

पुलिस के बार-बार हटाने के अनुरोध के बावजूद राहुल गांधी ने इनकार कर दिया और पूछा कि देश में वे कहां बैठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे लोकतंत्र बचाने के लिए वहां हैं और ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के बिना नहीं हटेंगे।

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