दिल्ली में 40 प्राइवेट स्लीपर बसों में से एक में भी नहीं मिला पैनिक बटन, रियलिटी चेक में सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी
नाबालिग से दुष्कर्म के बाद भी दिल्ली की निजी स्लीपर बसों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी जारी है। कई बसों ...और पढ़ें
HighLights
स्लीपर बसों में पैनिक बटन, सीसीटीवी कैमरे नदारद मिले।
अधिकांश बसों की खिड़कियों पर पर्दे लगे पाए गए।
चालकों को पैनिक बटन की जानकारी तक नहीं थी।
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। चलती स्लीपर बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद भी राजधानी की सड़कों पर दौड़ रही निजी स्लीपर बसों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी जारी है। यात्रियों, खासकर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम कई बसों में नदारद मिले।
बुधवार को की गई पड़ताल में दिल्ली भर से चलने वाली स्लीपर बसों में कहीं पैनिक बटन नहीं मिला तो कहीं सीसीटीवी कैमरे ही नहीं थे। हैरानी की बात यह रही कि कुछ बस चालकों को पैनिक बटन के बारे में जानकारी तक नहीं थी। इसके अलावा दिन में भी अधिकांश बसों की खिड़कियों पर पर्दे पड़े मिले, जिससे बस के भीतर की गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं देतीं।
लाल किला से जम्मू-कटरा जाने वाली बसों में सुरक्षा नाममात्र
लाल किला स्थित सुनहरी मस्जिद की पार्किंग से जम्मू और कटरा के लिए बड़ी संख्या में स्लीपर बसें चलती हैं। बुधवार को यहां करीब 40 बसें खड़ी मिलीं। लंबी दूरी की यात्रा को देखते हुए बसों में यात्रियों की सुविधा से जुड़े इंतजाम तो नजर आए, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से स्थिति चिंताजनक रही।
कई बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। जिन बसों में कैमरे लगे थे, उनकी खिड़कियों पर पर्दे लटके हुए थे। पड़ताल के दौरान एक भी बस में पैनिक बटन नहीं मिला। ऐसे में आपात स्थिति में यात्री मदद के लिए किस तरह तत्काल सूचना देंगे, यह बड़ा सवाल है।
मोरी गेट पर भी नियमों की अनदेखी
मोरी गेट से पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के लिए चलने वाली स्लीपर बसों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं मिली। यहां सौ से अधिक बसें सवारियों के इंतजार में खड़ी थीं। कुछ बसों में पैनिक बटन और सीसीटीवी कैमरे लगे मिले।
हालांकि, अधिकतर बसों में दोनों में से कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था। कुछ चालकों से पैनिक बटन के बारे में पूछा गया तो वे इसकी जानकारी तक नहीं दे सके। ऐसे में बसों की जांच और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।

दिखावे की सख्ती, रिश्वत लेकर बंद हो जाती हैं आंखें
आनंद विहार में निगम के पार्किंग है। यह सिर्फ कागजों में पार्किंग है, यहां अवैध बस अड्डा चल रहा है। शीशों पर लगे पर्दे व काली फिल्म वाली बसें यहां से चल रही हैं। यहां के बस चालकों का स्पष्ट कहना है हर एक चेक पाइन्ट पर रिश्वत दी जाती है।
अधिकारियों से लेकर सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों को कानून तोड़ने की रकम दी जा रही है तो कार्रवाई किस बात की। उनके लिए कानून से ज्यादा बस यात्रियों की सुविधा मायने रखती है। कार्रवाई का कुछ दिन का शोर है, हालात बदलेंगे नहीं।
