केंद्र सरकार ने दिया बजट, अब दिल्ली में होगी पहली वृक्ष गणना; क्यों खास है यह कदम?
केंद्र सरकार ने दिल्ली में पहली व्यापक वृक्ष गणना के लिए 2.9 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून के मार्गदर्शन में यह चार वर्षीय ...और पढ़ें
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दिल्ली हॉट आईएनए के समीप मार्ग पर लगे पेड़। चंद्र प्रकाश मिश्र

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली की आबोहवा को सुधारने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी में पेड़ों की पहली वृहद गणना के लिए 2.9 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। यह पहली बार है जब दिल्ली के ''हरित क्षेत्र'' का वैज्ञानिक और विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका
इस पूरी परियोजना का नेतृत्व और वित्तपोषण केंद्र के सहयोग से हो रहा है। केंद्र द्वारा आवंटित यह राशि गणना के पहले चरण को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र की इस पहल से दिल्ली के पर्यावरण प्रबंधन में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
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प्रधानमंत्री संग्रहालय में लगे पेड़। फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्र
इस वृक्ष गणना का पहला चरण एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कार्य करेगा, जिसमें गणना के लिए सबसे सटीक ''सैंपलिंग तकनीक'' का चयन किया जाएगा ताकि अगले चार वर्षों में पूरी दिल्ली का त्रुटिहीन डेटा तैयार किया जा सके।
परियोजना की खास बातें
- वैज्ञानिक मार्गदर्शन : इस गणना को देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की तकनीकी देखरेख में पूरा किया जाएगा, जो केंद्र सरकार के अधीन एक प्रमुख संस्थान है।
- सटीक डेटाबेस : केंद्र की इस मदद से दिल्ली के गैर-वन क्षेत्रों (सड़कें, कॉलोनियां, पार्क) में लगे एक-एक पेड़ की प्रजाति, उम्र और स्वास्थ्य का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।
- तीन चरणों में कार्य : चार साल तक चलने वाली इस परियोजना का पहला चरण पूरी तरह केंद्र द्वारा दी गई राशि से संचालित होगा।
क्यों खास है यह कदम?
दिल्ली में वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 से लागू है, लेकिन फंड और स्पष्ट कार्ययोजना के अभाव में कभी गणना नहीं हो सकी थी। अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और वित्तीय सहायता के बाद हर पेड़ की टैगिंग होने से पेड़ों की अवैध कटाई मुश्किल होगी।
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गणना के दौरान उन पेड़ों की पहचान की जाएगी जो दीमक या कंक्रीट की वजह से सूख रहे हैं। यह डेटा भविष्य में पौधारोपण के लिए सही जगह और सही प्रजाति चुनने में सरकार की मदद करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा फंड जारी करना यह दर्शाता है कि राजधानी के बिगड़ते पर्यावरण को लेकर वह कितनी गंभीर है। यह केवल एक गिनती नहीं, बल्कि दिल्ली को दोबारा ''फेफड़े'' देने की एक वैज्ञानिक कोशिश है।