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'बेटी तो बची नहीं, अब उसका शव तो दे दो', पिता की हाथ जोड़कर गुहार; मयूर विहार स्कूल हादसे में बड़ी लापरवाही

Published: Fri, 06 Nov 2026 01:32 PM (IST)

मयूर विहार के स्कूल में 9 वर्षीय उन्नति की मौत के बाद पिता को 36 घंटे तक बेटी का शव ...और पढ़ें

बच्ची की शोकाकुल मां (दाएं) व परिवार के अन्य सदस्य। जागरण

बच्ची की शोकाकुल मां (दाएं) व परिवार के अन्य सदस्य। जागरण

HighLights

  1. नौ वर्षीय उन्नति की स्कूल में हुई मौत।

  2. पिता को 36 घंटे बाद भी बेटी का शव नहीं मिला।

  3. मेडिकल बोर्ड गठन में देरी से पोस्टमार्टम टला।

शुजाउद्दीन, पूर्वी दिल्ली। सात साल की मन्नतों के बाद जिस बेटी को गोद में खिलाने का सपना पूरा हुआ था, उसका चेहरा आखिरी बार देखने के लिए पिता विकास को सरकारी व्यवस्था के सामने हाथ जोड़कर गुहार लगानी पड़ी।

9 वर्षीय उन्नति की मौत के 36 घंटे बाद भी परिवार को उसका शव नहीं मिल सका। बेटी की मौत से सदमे में आए पिता की आंखों में आंसू थे और वह बार-बार कह रहे थे, “बेटी तो बची नहीं, कम से कम उसका शव तो दे दो।”

मयूर विहार फेज-दो स्थित लवली हेरिटेज स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा उन्नति की बुधवार सुबह क्लासरूम में मौत हो गई थी। मेडिकल बोर्ड गठित नहीं होने के कारण गुरुवार को उसका पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। घर पर मां चंचल बेटी का इंतजार करती रहीं, जबकि पिता अस्पताल के शवगृह के चक्कर काटते रहे।

विकास गुरुवार को जांच अधिकारी के साथ एलबीएस अस्पताल पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि पोस्टमार्टम के बाद बेटी का शव मिल जाएगा। दोपहर तीन बजे तक वह डाक्टरों से पोस्टमार्टम करने की गुहार लगाते रहे।

खाली हाथ लौटना पड़ा

आरोप है कि डाक्टरों ने ड्यूटी खत्म होने की बात कहकर उन्हें घर जाने को कहा। विकास ने हाथ जोड़कर कहा कि वह घर जाकर पत्नी को क्या जवाब देंगे, क्योंकि वह बेटी का चेहरा देखना चाहती हैं। आखिरकार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि अंतिम दर्शन के लिए परिवार को और इंतजार नहीं कराना चाहिए।

मेडिकल बोर्ड गठित होने में लगा समय

परिवार ने बुधवार शाम मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की थी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मामले की प्रकृति के आधार पर विशेषज्ञ डाक्टरों का चयन किया जाता है और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाती है। इस प्रक्रिया में समय लगा। परिवार ने आरोप लगाया कि बच्ची की मौत के बाद भी व्यवस्था ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

मां बोली-लौटा दो मेरी बेटी

मां चंचल का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार अपनी बेटी को लौटाने की गुहार लगा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि बच्ची को स्कूल के पास के अस्पताल के बजाय दूर के अस्पताल में क्यों ले जाया गया।

पूर्वी जिला के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि बुधवार रात परिवार ने मेडिकल बोर्ड गठित करने का आग्रह किया था। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी गई। बोर्ड गठित होने के बाद शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा और शव स्वजन को सौंप दिया जाएगा।

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