अतिक्रमण और निर्माण से यमुना को भारी नुकसान, दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ा; पर्यावरण मंत्रालय को लिखी चिट्ठी
पर्यावरणविदों ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में मलबा डालने और अतिक्रमण व निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे नदी का पारिस्थितिकी ...और पढ़ें

यमुना बाढ़ क्षेत्र में मलबा डालने और अतिक्रमण व निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग।
HighLights
यमुना बाढ़ क्षेत्र में मलबा, अतिक्रमण से नदी को नुकसान।
नदी की जल वहन क्षमता घटी, दिल्ली में बाढ़ का खतरा।
पर्यावरणविदों ने निर्माण रोकने और समीक्षा की मांग की।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना बाढ़ क्षेत्र में मलबा डालने और अतिक्रमण व निर्माण कार्य के कारण नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है। इससे नदी का बहाव प्रभावित हो रहा है जिससे मानसून के दिनों में बाढ़ का खतरा बना रहता है।
पर्यावरणविदों ने पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय जल आय़ोग, दिल्ली सरकार व दिल्ली विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर यमुना किनारे कंक्रीट के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है।
उनका कहना है कि अतिक्रमण के कारण नदी की जल वहन क्षमता कम हो रही है। हरियाणा के हथनी कुंड से कम पानी छोड़े जाने पर भी दिल्ली में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। वर्ष 1978 की तुलना में हथनी कुंड से कम पानी छोड़े जाने के बाद भी वर्ष 2023 और व वर्ष 2025 में दिल्ली में यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली खंड में नदी का तल ऊंचा हो रहा है और इसकी जल धारण क्षमता घट रही है।
उन्होंने पत्र के साथ वीडियो और फोटो भेजकर आरोप लगाया है कि आइटीओ छठ घाट पर यमुना बाढ़ क्षेत्र में निर्माण मलबा और अरावली की चट्टानें डाली जा रही हैं। इससे 15 हेक्टेयर का घना जंगल नष्ट होने का खतरा है।
निर्माण सामग्री डालने से कदंब, जामुन, पीपल, बरगद, अमलतास, नीम, अर्जुन आदि के पेड़ को नुकसान हो रहा है। यहां पर होने वाले निर्माण कार्य की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस तरह के निर्माण एनजीटी द्वारा 13 जनवरी 2015 के ‘मैली से निर्मल यमुना’ को लेकर दिए गए निर्णय का भी उल्लंघन है। इसे तुरंत रोकने की आवश्यकता है।
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उन्होंने स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल गठित कर रिवर फ्रंट परियोजनाओं की समीक्षा करने, हाल के बाढ़ के कारणों का अध्ययन और डीडीए के बायोडायवर्सिटी पार्कों के बारे जानकारी देने की मांग की।
पत्र लिखने वालों में जल मंत्रालय के पूर्व सचिव शशि शेखर, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) मनु भटनागर, जल संसाधन विशेषज्ञ शिव सिंह रावत, यमुना जिये अभियान की सुधा मोहन, अर्थ वारियर के पंकज कुमार, साउथ एशिया नेटवर्क आन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल (सैंड्रप) के सह संयोजक भीम सिंह रावत सहित अन्य पर्यावरणविदों व नागरिक शामिल हैं।