Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    लंदन और न्यूयार्क की राह पर Delhi-NCR, दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट का कनेक्शन बदल देगा हवाई सफर का अंदाज

    Updated: Mon, 15 Jun 2026 11:21 PM (GMT+05:30)

    जेवर और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लंदन के हीथ्रो-गैटविक और न्यूयॉर्क के जेएफके-ला ग्वार्डिया की तरह मिलकर काम करेंगे। यह कनेक्शन दिल्ली-एन ...और पढ़ें

    दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट का कनेक्शन होगा खास। फोटो: एआई जनरेटेड

    दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट का कनेक्शन होगा खास। फोटो: एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. नोएडा-IGI लंदन-न्यूयॉर्क के एयरपोर्ट मॉडल पर करेंगे काम

    2. यात्रियों को मिलेगी सस्ती टिकटें और कम भीड़ से राहत

    3. दिल्ली-एनसीआर बनेगा दुनिया का अगला बड़ा एविएशन हब

    गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। दिल्ली-NCR का एविएशन भविष्य अब दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों, लंदन और न्यूयार्क की राह पर चल पड़ा है।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से इंदिरा गांधी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI) को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि ये दोनों मिलकर ठीक वैसे ही काम करेंगे जैसे लंदन में हीथ्रो-गैटविक और न्यूयार्क में जेएफके -ला ग्वार्डिया करते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लंदन और न्यूयॉर्क का इतिहास गवाह है कि जब किसी बड़े महानगर की आबादी और अर्थव्यवस्था बढ़ती है, तो एक अकेला एयरपोर्ट नाकाफी हो जाता है। नोएडा और IGI की यह जुगलबंदी दिल्ली-एनसीआर को दुनिया का अगला बड़ा एविएशन कैपिटल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    दूरी का गणित

    अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या दो एयरपोर्ट्स का इतना पास होना ठीक है? लंदन व न्यूयार्क के एयरपोर्टों के बीच की दूरी बताती है कि यह दूरी आदर्श है। जेवर और आईजीआई (दिल्ली- एनसीआर) एयरपोर्ट के बीच सड़क मार्ग से दूरी करीब 72 से 75 किलोमीटर है।

    वहीं हीथ्रो और गैटविक (लंदन) के बीच की दूरी लगभग 65 से 70 किलोमीटर है। जेएफके और ला ग्वार्डिया (न्यूयार्क), हालांकि दोनों शहर के भीतर पास हैं, लेकिन न्यूयार्क का तीसरा बड़ा एयरपोर्ट नेवार्क मुख्य शहर से करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर न्यू जर्सी में है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि जब लंदन और न्यूयार्क जैसे शहरों में इतनी दूरी पर बने एयरपोर्ट्स बिना आपस में टकराए सालों से कामयाबी के साथ करोड़ों यात्रियों को संभाल रहे हैं, तो दिल्ली-एनसीआर में भी यही जुगलबंदी सुपरहिट होगी, इसे लेकर किसी को संदेह नहीं करना चाहिए।

    खबरें और भी

    ये दिखेंगे बदलाव

    • यात्रियों का बंटवारा: लंदन में 'हीथ्रो' मुख्य रूप से प्रीमियम और लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संभालता है, जबकि 'गैटविक' डोमेस्टिक और बजट एयरलाइंस के लिए जाना जाता है। यही माडल यहां भी दिखेगा। आने वाले समय में आइजीआइ वैश्विक उड़ानों का गढ़ रहेगा, जबकि जेवर नए रूट्स, घरेलू उड़ानों और कार्गो का बड़ा हब बनेगा।
    • समय और कंजेशन से राहत: जैसे न्यूयार्क के आसमान में एयर ट्रैफिक को अलग-अलग एयरपोर्ट्स के जरिए नियंत्रित किया जाता है, वैसे ही दिल्ली के आसमान में भी विमानों को लैंडिंग के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
    • प्रतिस्पर्धा से घटेंगे दाम: दो बड़े एयरपोर्ट होने से एयरलाइंस कंपनियों को ज्यादा स्लाट्स (विमान उड़ाने और पार्क करने का समय) मिलेंगे। जब स्लाट्स के लिए मारामारी कम होगी, तो कंपनियों के संचालन की लागत घटेगी, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को सस्ती टिकटों के रूप में मिलेगा।

    आईजीआई एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त और दुनिया के शीर्ष एयरपोर्ट में शुमार रहता है, जिसने सालाना 10 करोड़ (100 मिलियन) से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता हासिल कर ली है।

    भारत का एविएशन बाजार हर साल 10 से 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट दिल्ली के यात्री नहीं छीनेगा, बल्कि इस तेजी से बढ़ते अतिरिक्त ट्रैफिक के दबाव को बांटेगा।

    यह भी पढ़ें- दिल्ली एयरपोर्ट पर ढ़ाई घंटे चली सुरक्षा जांच, नाराज होकर वापस लौटे बांग्लादेशी पीएम के सलाहकार

    यह भी पढ़ें- यूपी में चलेगी बुलेट ट्रेन, दिल्ली से वाराणसी वाया प्रयागराज रहेगा रूट, कई जिलों में होगा भूमि अधिग्रहण