विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली में अवैध PG का 20000 करोड़ का कारोबार, सियासत की नींव पर खड़ी हो रहीं इमारतें

Published: Mon, 14 Sep 2026 01:12 PM (IST)

राजधानी दिल्ली में अवैध पीजी का कारोबार राजनीतिक संरक्षण के चलते फल-फूल रहा है, जहां आग सुरक्षा और बिल्डिंग बायलाज का उल्लंघन हो रहा है।

सत्य निकेतन मार्केट में इस तरह की इमारतों में संचालित होते हैं पीजी, ज्यादातर हैं पांच मंजिला। जागरण

सत्य निकेतन मार्केट में इस तरह की इमारतों में संचालित होते हैं पीजी, ज्यादातर हैं पांच मंजिला। जागरण

HighLights

  1. अवैध पीजी में आग सुरक्षा और बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन।

  2. 20 हजार करोड़ का असंगठित कारोबार, सरकार को राजस्व हानि।

  3. राजनीतिक संरक्षण, टैक्स चोरी और बिजली चोरी का बड़ा खेल।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली की गलियों में चमचमाती इमारतों के अंदर अवैध पीजी का कारोबार फल-फूल रहा है। यहां न तो आग से सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही बिल्डिंग बायलाज का पालन किया जा रहा है।

इसके बावजूद राजनीतिक संरक्षण के चलते इनकी नींव साल दर साल मजबूत होती जा रही है, जिससे दिल्ली में ही अवैध पीजी का करीब 20 हजार करोड़ का कारोबार खड़ा हो चुका है। यहां छात्रों से खाना, बिजली बिल, इंटरनेट और लांड्री सर्विस के नाम पर मोटा पैसा तो लिया जा रहा है, लेकिन सरकार के राजस्व में इससे कोई वृद्धि नहीं हो रही है।

पीजी कारोबारी न तो रिटर्न भर रहे और न ही जीएसटी दे रहे हैं। पीजी कारोबार पूरी तरह से असंगठित है, जिसके नियमन लिए कोई केंद्रीयकृत व्यवस्था या रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी नहीं है।

एमसीडी के नक्शे में आवासीय मकान

अधिकतर पीजी बाहर से देखने पर चार या पांच मंजिला इमारत दिखाई देते हैं। एमसीडी के नक्शे में भी ये आवासीय मकान के रूप में ही दर्ज होते हैं, लेकिन अंदर छोटे-छोटे कमरे होते हैं, हर कमरे में तीन से चार लड़के या लड़कियों को रखा जाता है। इनसे आठ से 15 हजार रुपये तक प्रति बेड वसूला जाता है।

मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, राजेंद्र नगर, बेर सराय, कटवरिया सराय, सत्य निकेतन, विवेक विहार, हौजखास, माडल टाउन की गलियों में ये हालात आसानी से देखे जा सकते हैं। पार्किंग की जगह पर किचन, बालकनी को तोड़कर कमरा, और छत पर टीन शेड डालकर अतिरिक्त कमरे बनाए जाते हैं। इनके पास फायर एनओसी और बिल्डिंग स्ट्रक्चर सर्टिफिकेट भी नहीं होता है।

यही नहीं विभागीय अफसरों के संरक्षण में इन पीजी में बिजली चोरी भी खुलेआम हो रही है। यहां दो केवी का घरेलू कनेक्शन लिया जाता है, जबकि एसी, गीजर, इंडक्शन सबकुछ चल रहा होता है। यानी लोड करीब लेकर 15 केवी का रहता है।

सिस्टम की खामियों से बन चुकी समानांतर अर्थव्यवस्था

सिस्टम की खामियों के चलते दिल्ली में पीजी का कारोबार राज्य की अर्थव्यवस्था के समानांतर अर्थव्यवस्था का रूप लेता जा रहा है। पीजी संचालक सरकारी विभागों को चकमा देने के लिए कई तरह का फर्जीवाड़ा करते हैं। अधिकतर पीजी, नेताओं व बड़े अधिकारियों के होने के कारण इनके खिलाफ कार्रवाई की कोई हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, पीजी से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा एमसीडी से पुलिस अधिकारियों तक की जेब में सुविधाशुल्क के रूप में जा रहा है। यही वजह है कि सबकुछ जानने के बाद भी एमसीडी के जूनियर इंजीनियर से लेकर पुलिस का बीट अफसर तक मौन रहते हैं।

ऐसे चलता है फर्जीवाड़े का खेल

  • रेंट एग्रीमेंट : पीजी मालिक छात्रों के साथ कोई लिखित रेंट एग्रीमेंट नहीं करते। अगर करते भी हैं, तो किराया पांच से 10 हजार रुपये (आयकर सीमा से नीचे) दिखाते हैं, जबकि बाकी की रकम सुविधाओं (खाना, एसी, वाई-फाई) के नाम पर नकद वसूली जाती है।
  • अकाउंट्स का विकेंद्रीकरण : किराया नकद में लिया जाता है। आनलाइन किराया यदि लेते हैं तो व्यावसायिक खाते के बजाय कर्मचारियों, रिश्तेदारों, केयरटेकर के खाते में पैसा जाता है, ताकि आयकर विभाग की रडार से बचा जा सके।
  • डिजिटल फुटप्रिंट का अभाव: नकद में लिया गया यह पैसा प्रापर्टी, सोने या अनौपचारिक लेनदेन में खप जाता है। बैंक में पैसा जमा न होने के कारण इसका कोई डिजिटल फुटप्रिंट नहीं बन पाता है।

इन नियमों की होती है अनदेखी

  • पीजी व्यावसायिक गतिविधि है, जबकि अवासीय संपत्ति दिखाकर टैक्स चोरी की जाती है
  • आवासीय इलाके में नौ मीटर से ऊंची इमारत में पीजी चल रहा है तो फायर एनओसी अनिवार्य है
  • पीजी में 20 या उससे अधिक लोगों के रहने पर फायर एनओसी की जरूरत होती है
  • ए और बी श्रेणी की कालोनी में यह पीजी नहीं चल सकते हैं
  • बिजली और पानी के मीटर व्यावसायिक होने चाहिए लेकिन निजी श्रेणी के लगाए जाते हैं

यह भी पढ़ें- सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG का सर्वे, 2250 में 138 इमारतों में खामी; दक्षिणी जोन सबसे आगे