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पहले सैदुलाजाब, फिर हौजरानी और अब सत्य निकेतन... नहीं बदल रहे दिल्ली के हालात; कई खामियां उजागर

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:58 PM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 07:50 AM (IST)

दिल्ली में सैदुलाजाब और हौजरानी के बाद सत्य निकेतन की घटना ने अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई की ...और पढ़ें

सत्य निकेतन की घटना ने अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई की कमी को उजागर किया है।

सत्य निकेतन की घटना ने अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई की कमी को उजागर किया है।

HighLights

  1. सैदुलाजाब, हौजरानी के बाद सत्य निकेतन में भी हादसा।

  2. अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में कमी।

  3. एमसीडी, जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग की लापरवाही जिम्मेदार।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सैदुलाजाब में इमारत ढहने और हौजरानी अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार के आदेश पर इलाके के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति बनी थी, जिसमें एमसीडी से लेकर पुलिस और अग्निशमन के अधिकारियों को शामिल किया गया था।

इसमें हर इलाके में अवैध और जर्जर पर कार्रवाई के साथ नियमों के खिलाफ चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान कर उन्हें बंद कराना था। लेकिन सैदुलाजाब और हौजरानी के बाद सत्य निकेतन की घटना ने यह साबित कर दिया कि हालात नहीं बदले हैं।

अगर, जिला प्रशासन ने नियमों के विपरित चलने वाले इस पीजी की पहचान अपनी जांच करके कार्रवाई की होती तो जानें बच सकती थीं। चूंकि पीजी एक साल से चल रहा था और ज्यादा पैसा कमाने के लिए पीजी के ढांचे में मरम्मत के नाम पर अंदरखाने बदलाव किए जाने से घटना हो गई।

इन घटनाओं के बाद दिल्ली में कोई सुधार नहीं आया है। अब भी दिल्ली के मुनिरका से लेकर कालू सराय, सत्य निकेतन, राजेंद्र नगर, करोल बाग, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, पांडव नगर, मुखर्जी नगर, उत्तम नगर जैसे इलाकों में पीजी संकरी गलियों में चल रहे हैं।

घटना वाले इलाके सत्य निकेतन का भी यही हाल

जहां 50-60 गजों के मकान तक में 20-25 बच्चे रहते हैं। पर, दिल्ली के हर जिले में बनी जांच समिति और अन्य एजेंसियों की नजर इन पर नहीं जाती। घटना वाले इलाके सत्य निकेतन का भी यही हाल है। यहां पर दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों को आवास की सुविधा देने के नाम पर पीजी चल रहे हैं।

जो कॉलोनी मध्य दिल्ली के इलाकों से विभिन्न झुग्गियों को हटाने के एवज में बसाई गई थी वहां पर अब प्लाटों की कीमत 5-7 लाख रुपये गज की है। पूरे इलाके को पीजी में तब्दील कर दिया गया है लेकिन एजेंसियां यहां कार्रवाई नहीं करती हैं।

घटना के लिए ये हैं जिम्मेदार एजेंसी

  • एमसीडी- इलाके में होने वाली निर्माण और मरम्मत कार्य नियमों के अनुसार हो, इसकी जिम्मेदारी एमसीडी की है। एमसीडी के पास अधिकार है कि बिना मंजूरी के होने वाले निर्माण और मरम्मत पर कार्रवाई करें लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं होने से इसकी सीधी जिम्मेदारी एमसीडी की है।
  • जिला प्रशासन- चूंकि जिलाधिकारी को यह शक्ति दी गई थी कि वह ऐसी इमारतों की पहचान करें जो हैं तो रिहायशी लेकिन उपयोग उसका व्यावसायिक हो रहा है। ऐसे में आदेश के बाद भी इस संपत्ति को कार्रवाई के दायरे में न लाने की जिम्मेदारी दक्षिणी जिले के जिलाधिकारी की है।
  • अग्निशमन- चूंकि यह इमारत 15 मीटर से ऊंची थी और इसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा था। इसलिए अग्निशमन विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से इन्कार नहीं कर सकता। अगर, इस इमारत के व्यावसायिक उपयोग होने पर फायर एनओसी की जांच की होती यह घटना रुक सकती थी।

एमसीडी को छोड़ किसी विभाग ने नहीं की कोई कार्रवाई

30 मई को सैदुलाजाब में चार मंजिला इमारत गिरने से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों समेत छह लोगों की मृत्यु हो गई थी। तीन जून को हौजरानी आग हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई थी। दोनों घटनाओं की मजिस्ट्रेटी जांच हुई थी। इसमें एमसीडी समेत दूसरी एजेंसियों को जिम्मेदार पाया गया था।

लेकिन, एमसीडी को छोड़ किसी अन्य विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई के बजाय मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। एमसीडी ने जहां सैदुलाजाब वाली घटना में जेई और एई को निलंबित कर दिया था वहीं हौजरानी की घटना में सहायक निगम स्वास्थ्य निरीक्षक को भी नौकरी से हटा दिया था।

हौजरानी आग की घटना में एमसीडी के अतिरिक्त दिल्ली पुलिस को आदेश के बाद भी काम न रोकने के लिए जिम्मेदार माना गया था। पर्यटन विभाग को लाइसेंस देने के दौरान वास्तविक स्थिति की जांच न करने के लिए जिम्मेदार माना गया था। साथ ही बिजली कंपनी को अवैध हिस्से की बिजली काटने के अनुरोध पर भी कार्रवाई न करने के लिए जिम्मेदार माना गया था।

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