पीजीडीएवी कॉलेज समेत साउथ केंपस में हिंदी-संस्कृत ऑनर्स में 50 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली
डीयू के पीजीडीएवी सांध्य और दक्षिणी परिसर के कई कॉलेजों में हिंदी व संस्कृत ऑनर्स की 50% से अधिक सीटें ...और पढ़ें

दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी और संस्कृत ऑनर्स की आधी से अधिक सीटें खाली छात्रों की घटती रुचि बनी चिंता का विषय।
HighLights
पीजीडीएवी समेत डीयू में 50% से अधिक सीटें खाली।
छात्रों की भाषा विषयों में रुचि घट रही है।
शिक्षक कटऑफ से प्रवेश की अनुमति मांग रहे हैं।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। डीयू के पीजीडीएवी सांध्य कालेज में हिंदी और संस्कृत आनर्स की 50 प्रतिशत से अधिक सीटें अब भी खाली हैं। हिंदी आनर्स की 50 सीटों में करीब 25 सीटों पर दाखिला नहीं हुआ है, जबकि संस्कृत आनर्स की 54 में करीब 27 सीटें रिक्त हैं। दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से भाषा विषयों में विद्यार्थियों की घटती रुचि को लेकर शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
शिक्षकों के अनुसार, सीयूईटी के जरिए दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के बाद भाषा विषयों में प्रवेश का स्वरूप बदला है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें उन्हें पढ़ाई के साथ रोजगार और कौशल विकास के अधिक अवसर दिखाई देते हैं।
कंप्यूटर, मैनेजमेंट, मीडिया, डेटा और अन्य स्किल आधारित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की पसंद में तेजी से ऊपर आए हैं। इसका सीधा असर हिंदी और संस्कृत जैसे पारंपरिक भाषा विषयों पर पड़ रहा है।वहीं इस मामले में डीयू की प्रवेश डीन हनीत गांधी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नही मिली।
दक्षिणी परिसर में भी स्थिति चिंताजनक
पीजीडीएवी कालेज के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के कई कालेजों में भी हिंदी और संस्कृत आनर्स की आधी से अधिक सीटें खाली हैं। जिन्न्हें हिंदी और संस्कृत विभाग को भरना मुश्किल हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि इन विषयों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का एक कारण रोजगार को लेकर बनी धारणा भी है। विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि भाषा विषयों की तुलना में स्किल आधारित पाठ्यक्रमों से रोजगार के रास्ते अधिक आसानी से खुलते हैं।
कट ऑफ से प्रवेश की मांग
शिक्षकों का कहना है कि भाषा विषयों में खाली सीटों को भरने के लिए डीयू प्रशासन को प्रवेश प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने चाहिए। उन्होंने कालेजों को कटआफ जारी कर मेरिट के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति देने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे ऐसे विद्यार्थियों को भी अवसर मिलेगा, जो हिंदी या संस्कृत में पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन सीयूईटी आधारित प्रक्रिया में इन विषयों को प्राथमिकता नहीं दे पाए।
अरबिंदों कॉलेज के प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा कि, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और उनके अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर विशेष प्रयास जरूरी हैं। यदि बड़ी संख्या में सीटें लगातार खाली रहती हैं तो भविष्य में इन विषयों के प्रति विद्यार्थियों की रुचि और प्रभावित हो सकती है।
