फर्जी ID, बैंक खाते और 16 लाख की ठगी; दिल्ली में 10 साल पुराने केस में प्राॅपर्टी डीलर गिरफ्तार
द्वारका दक्षिण पुलिस ने 10 साल पुराने साइबर ठगी के मामले में सुनील गुप्ता को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी के मामले को सुलझाते हुए 45 वर्षीय आरोपित सुनील गुप्ता उर्फ सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।
HighLights
द्वारका पुलिस ने 10 साल पुराने साइबर ठगी मामले में गिरफ्तारी की।
आरोपी ने फर्जी आईडी से बैंक खाते खुलवाकर 16 लाख रुपये ठगे।
नोटबंदी के दौरान नकद निकालने के बजाय सोने के सिक्के खरीदे।
मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका दक्षिण थाना पुलिस ने दस साल पुराने साइबर ठगी के मामले को सुलझाते हुए 45 वर्षीय आरोपित सुनील गुप्ता उर्फ सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने नाटग्रिड (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड) विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटाने में मदद करने वाला मंच है की मदद से संदिग्धों की जानकारी जुटाई।
इसके बाद मिली सूचना के आधार पर 21 अगस्त को उत्तम नगर के भगवती गार्डन स्थित उसके कार्यालय से उसे गिरफ्तार किया। आरोपित वर्तमान में प्रापर्टी डीलर का काम कर रहा था।
सोने के सिक्के खरीद लिए
द्वारका उपयुक्त कुशल पाल सिंह अनुसार, वर्ष 2016 में आरोपितों ने एचडीएफसी बैंक के अधिकारी बनकर गुवाहाटी निवासी महिला से उसके बैंक खाते, एटीएम और पिन की गोपनीय जानकारी हासिल की थी। इसके बाद नेफ्ट और आइएमपीएस के जरिये उसके खाते से 16.08 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए गए। नोटबंदी के कारण आरोपित रकम नकद नहीं निकाल सके तो दिल्ली की अलग-अलग आभूषण दुकानों से सोने के सिक्के खरीद लिए।
फर्जी पहचान पत्र से खुलवाते थे बैंक खाते
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर खोले गए अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी। पुलिस के मुताबिक, सुनील फर्जी पहचान पत्र तैयार कर उनके आधार पर बैंक खाते खुलवाता था और इन्हें अपने साथी ईशान माहे को उपलब्ध कराता था। इसके बदले उसे प्रत्येक खाते के लिए चार से पांच हजार रुपये मिलते थे।
मामला पहले असम के पान बाजार थाने में दर्ज हुआ था और बाद में द्वारका दक्षिण थाने में स्थानांतरित किया गया। वर्ष 2019 में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की गई थी। अदालत के निर्देश पर दोबारा जांच शुरू होने के बाद पुलिस टीम ने बैंक खातों और आरोपितों द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल की। इसी दौरान नाटग्रिड की मदद से संदिग्धों से संबंधित जानकारी जुटाई गई।
नोटबंदी में नकदी नहीं निकाल सके तो खरीदे सोने के सिक्के
पूछताछ में सुनील ने बताया कि वह करीब 20-22 वर्ष पहले पश्चिम बंगाल से दिल्ली आया था और टैक्सी चलाने लगा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात ईशान माहे से हुई। वर्ष 2016 में उसकी मुलाकात इंदरपुरी में रहने वाले अरुण से हुई, जो पहले से साइबर ठगी में शामिल था। पुलिस के अनुसार, अरुण और ईशान के साथ मिलकर सुनील ने गुवाहाटी की महिला के खाते से करीब 16-17 लाख रुपये दूसरे खातों में स्थानांतरित कराए।
साइबर अपराध के चार मामले पहले से दर्ज
पुलिस के मुताबिक, नोटबंदी के कारण आरोपित डेबिट और क्रेडिट कार्ड से नकदी नहीं निकाल सके। इसके बाद उन्होंने फर्जी पहचान के आधार पर इस्तेमाल किए गए कार्ड से दिल्ली की अलग-अलग आभूषण दुकानों से सोने के सिक्के खरीदे और बाद में इन्हें आपस में बांट लिया। आरोपित के खिलाफ ठगी और साइबर अपराध के चार मामले पहले से दर्ज हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।
