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हापुड़, मोदीनगर और नूंह के गांवों में हैं मिलावट के कुख्यात ठिकाने, NCR में बेच रहे यूरिया-डिटर्जेंट से बना खोया पनीर

Published: Wed, 28 Oct 2026 03:48 PM (IST)Updated: Wed, 28 Oct 2026 03:58 PM (IST)

त्योहारी सीजन में दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में नकली मावा, पनीर और मिठाइयों की भरमार है, जो हापुड़, मोदीनगर और नूंह ...और पढ़ें

भट्टी पर चढ़ाने से पहले नीले ड्रम में मिलावटी दूध में डिटर्जेंट मिलाया कारीगर। जागरण

भट्टी पर चढ़ाने से पहले नीले ड्रम में मिलावटी दूध में डिटर्जेंट मिलाया कारीगर। जागरण

HighLights

  1. हापुड़, मोदीनगर, नूंह में बन रहा नकली मावा-पनीर।

  2. यूरिया, डिटर्जेंट से तैयार हो रहा सिंथेटिक दूध।

  3. खाद्य सुरक्षा विभाग की मिलीभगत से मिलावट जारी।

जागरण टीम, नई दिल्ली। दीवाली के ठीक पहले बाजार में शुद्धता के बड़े-बड़े दावे करने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की कलई तब खुल गई, जब 'दैनिक जागरण' की टीम ग्राहक बनकर धरातल पर हकीकत खंगालने पहुंची। 

मिलावटखोर तो डंके की चोट पर दावा करते हैं कि विभाग का स्टाफ भी उनके इस नकली खोये को नहीं पहचान सकता।

आज हम आपके सामने उप्र-हरियाणा एनसीआर में मिलावट के कुख्यात गांवों की रिपोर्ट पेश कर रहे हैं गाजियाबाद से आदित्य त्रिपाठी, हापुड़ से डीपी आर्य और नूंह से मोहम्मद हारून...

'भैया! हम तो सालों से पाउडर से खोया बना रहे'

‘भैया! हम तो सालों से पाउडर से खोया बना रहे हैं, आज तक कोई पहचान ही नहीं पाया...त्योहार पर कौन सा लोग खुद खाते हैं, सब तो दूसरों को बांटने के लिए खरीदते हैं।’

यह हैरान और विचलित करने वाला तर्क मोदीनगर स्थित कलछीना गांव से लेकर नूंह के पिनगवां तक में बैठे उन दुष्ट मिलावटखोरों का है जो खुलेआम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग की पहुंच भी इन गांवों से दूर

मोदीनगर स्थित कलछीना गांव में त्योहारों के दौरान शाम का नजारा अन्य गांवों से बिल्कुल अलग होता है। यहां सूरज ढलते ही कई घरों में भट्टियां धधकने लगती हैं, जिन पर बड़े पैमाने पर नकली मावा तैयार किया जाता है।

भट्टियां जलने के साथ ही गांव में खरीदारों का आना-जाना भी शुरू हो जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए इस गांव में छापा मारना आसान नहीं है।

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क्या विभाग की मंशा में भी है मिलावट?

दरअसल, तमाम सख्तियों के बावजूद विभाग की मंशा में भी मिलावट है। विभाग की टीम के गांव में दाखिल होते ही खबर पूरे गांव में फैल जाती है।

जिसके बाद छापेमारी से बचने के लिए तुरंत तैयार किए गए नकली मावे को गांव के तालाब में फेंक दिया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये लोग किसी भी अनजान व्यक्ति को नकली सामान नहीं बेचते।

दिल्ली में होती है बड़े मात्रा में आपूर्ति

केवल पूर्व परिचित और भरोसेमंद लोगों को ही यह मावा बेचा जाता है, या उनके द्वारा भेजे गए लोगों को। मावे की इस अवैध बिक्री के लिए खास सफेद सोड़ा, पीला सोड़ा जैसे कोड वर्ड हैं।

गांव में नकली मावा बनाने वालों में मुख्तार, अयूब और फारूक तीन मूल सूत्रधार हैं। त्योहारी सीजन में रात में गांव के बाहर ट्रक खड़े हो जाते हैं इसकी आपूर्ति दिल्ली ही होती है।

दिखाते रहो कानूनी घुड़की, मिलावट का धंधा नहीं रुकता

अब हापुड़ की ओर देखें जहां से हर दूसरे मिलावटी खाद्य सामग्री पकड़ी जाती है। यहां रझैटी गांव मिलावटी रसगुल्ले बनाने के लिए एक दशक से कुख्यात है।

नामचीन बड़े मिलावट माफिया ने बताया कि दस साल में पांच बार सैंपल लिया गया, थोड़ा जुर्माना लगा, लेकिन धंधा मंदा नहीं पड़ा। अबकी बार एक अफसर से थोड़ी सख्ती दिखाई और रिपोर्ट दर्ज करा दी।

एक घंटे में थाने से जमानत पर आ गए और अब संबंधित अधिकारी जांच का सामना कर रहे हैं।

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18 जगहों पर धड़ाधड़ बन रहे मिलावटी रसगुल्ले

यही हाल पश्चिमी उप्र में नकली पनीर बनाने वालों को केमिकल की सप्लाई करने वाले का है। यहां सरसों का तेल, घी, मावा व पनीर, सभी जांच में अनसेफ मिले हैं, लेकिन धंधा किसी का बंद नहीं हुआ।

हापुड़ के मिलावट माफिया सबसे बड़ा दावा यह करते हैं कि बिना लैब के कोई पहचान नहीं कर पाया, कोई धंधे को रोक नहीं पाया। यहां बहादुरगढ़ क्षेत्र के रझैटी गांव में करीब 18 स्थानों पर रसगुल्ला तैयार किया जा रहा है।

बाहर दरवाजे पर ताला लगा रहता है, अंदर काम चलता रहता है। मात्र सौ रुपये किलो की दर बेचा जाता है।

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एआई की मदद से बनाया गया इंफोग्राफ

सिंभावली में बना रहे मिलावटी पनीर

सिंभावली टोडरपुर गांव में बड़े स्तर पर मिलावटी पनीर तैयार किया जा रहा है। मैदा और सूजी को पनीर जैसा रंग व साफ्टनेस देने के लिए केमिकल मिलाया जाता है।

यहां पर दर्जनभर से ज्यादा स्थानों पर पनीर तैयार किया जा रहा है। 100 किलो में इसकी सप्लाई दिल्ली व हरियाणा तक की जा रही है। यहां से रोजाना करीब 20 कैंटर में पनीर बाहर भेजा जाता है।

धौलाना में आलू और मिल्क केक से तैयार हो रहा मावा 

धौलाना के लालपुर में आलू और मिल्क केक से मावा तैयार किया जाता है। यहां से मावे की सप्लाई बड़े स्तर पर एनसीआर, दिल्ली और हरियाणा तक की जाती है। यही हाल सपनावत और वनखंडा गांव का है।

वनखंडा गांव में नकली क्रीम बनाने का बड़ा काम है। यहां एक साल में चार बार मिलावटी क्रीम नष्ट कराकर सैंपल लिए जा चुके हैं, मजाल है काम पर कोई आंच आई हो।

यूरिया से सर्फ से तैयार हो रहा आपका पसंदीदा रसगुल्ला

अब चलते हैं नोएडा से 80 किमी दूर नूंह। यहां नियाला, लुहिंगाकला, पुन्हाना, सिंगार, शिकरावा, लुहिंगाकला, आकेड़ा मोड, बोडी कोठी, अलीपुर तिघरा, सुनहेड़ा बार्डर, जमालगढ़ गांव मिलावटी मिठाई बनाने के लिए कुख्यात माने जाते हैं।

यहां थोक के भाव में रसगुल्ला, गुलाब जामुन बनते हैं और सीधे ब्रांडेड डिब्बों में पैक होने के उन कंपनियों को लिए चले जाते हैं। जी, जिस रसगुल्ला, गुलाब जामुन को ब्रांडेड समझ कर खरीद रहे हैं वह भी इसी तरह तैयार अशुद्ध वातावरण और मिलावट के साथ तैयार होते हैं।

यूरिया, सर्फ और पाम ऑयल से बना रहे सिंथेटिक दूध

गांवों के अधिकतर घरों में चूल्हों पर भट्टियां चढ़ जाती हैं और कड़ाहियों में रसगुल्ले, गुलाब जामुन व छेना तैयार होने लगता है।

पहली नजर में आपको यह मिठास किसी उत्सव की तैयारी जैसी लगेगी, कम लागत में मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में यहां यूरिया, सर्फ व पाम ऑयल से बनने वाले सिंथेटिक दूध सब मिलता, कड़ाहियों में पकता नजर आएगा।

इनकी कीमत महज 120 रुपये से डेढ़ सौ रुपये प्रति किलो है।

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दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में 28 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार।

लैब में सबको मिल जाती है क्लीन चिट

यहां से इन मिठाइयों को तैयार कर अपने यहां शहर में नहीं खपाया जाता बल्कि गुरुग्राम, दिल्ली आपूर्ति की जाती है। त्योहार के आसपास होने वाली छापेमारी आज भी इतनी परंपरागत है कि जांच में मिलावट पुष्ट होने के बावजूद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है।

मौके पर सब नष्ट करा दिया जाता है और प्रयोगशाला में सबको क्लीन चिट मिल जाती है। पुलिस और विभाग हमले के डर की आड़ लेते हुए कार्रवाई से बचते हैं।

'समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा'

कलछीना में मिलावटखोरों पर एक माह पहले बड़ी कार्रवाई की गई, इसके बाद अब वहां पर मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाना बंद कर दिया गया है। दोबारा वहां पर खाद्य पदार्थ में मिलावट न हो, इसके लिए समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।

-सुरेश कुमार मिश्रा, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग।

मिठाइयों के पैकेट पर विवरण चस्पाने के निर्देश

त्योहार पर मिलावटी मिठाइयों का निर्माण तेज हो जाता है, इसके लिए विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। पिछले दिनों चार सैंपल भी लिए गए हैं।

मिलावटी मिठाइयों को लेकर मिठाई में प्रयोग होने वाली सामग्री तेल व घी के बारे में नोटिस मिठाई पर चस्पा करने के लिए निर्देश दे दिए गए है।

-डॉ. विकास जागलान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी नूंह।

दिल्ली एनसीआर में त्योहारी सीजन पर डेयरी उत्पादों की मांग (प्रतिदिन)

उत्पाद

सामान्य मांग

त्योहारी सीजन मांग

दूध 110 से 120 लाख लीटर 140 से 150 लाख लीटर
पनीर 3.5 से 4 लाख किलो 6 से 7 लाख किग्रा
घी 1.8 से 2.2 लाख किग्रा 2.5 से 3.3 लाख किग्रा
मावा 50 से 70 टन 500 से 600 टन

नोट: आंकड़े प्रतिदिन के हिसाब से हैं।

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