शरीर पर टैटू बनवाना खतरनाक, एक्सपर्ट्स की सलाह नहीं मानी तो हो सकते हैं HIV के शिकार
टैटू बनवाने का बढ़ता शौक एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसे रक्त-जनित संक्रमणों का खतरा बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने टैटू केंद्रों ...और पढ़ें
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HighLights
टैटू से एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसे संक्रमण का खतरा।
दिल्ली में 14 लाख जांचों में 5,570 नए एचआईवी संक्रमित।
विशेषज्ञों ने टैटू केंद्रों के नियमन और निगरानी की मांग की।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। शरीर पर टैटू बनवाने का बढ़ता शौक अब एचआईवी समेत रक्त से फैलने वाले संक्रमणों के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। टैटू बनाते समय सुई त्वचा में बार-बार प्रवेश करती है। संक्रमित व्यक्ति पर इस्तेमाल हुई सुई या उपकरण दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल होने से एचआईवी और हेपेटाइटिस बी-सी का खतरा हो सकता है।
डर्मेटोलाजिस्ट और डाक्टरों की राष्ट्रीय संस्था फायमा के संयोजक डॉ. मनीष जांगरा का कहना है कि टैटू के बढ़ते चलन ने संक्रमण का खतरा बढ़ाया है।
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. बिभु आनंद ने भी इसे स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक बताते हुए सावधानी की जरूरत बताई है। दोनों विशेषज्ञों ने टैटू केंद्रों के लिए स्पष्ट स्वास्थ्य मानक और निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता भी जताई।
14 लाख 29 हजार जांच में मिले 5,570 संक्रमित
दिल्ली स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के अनुसार, 2025-26 में दिल्ली में 14 लाख 29 हजार एचआईवी जांच हुईं। इनमें 5,570 नए संक्रमित मिले, जबकि 44,546 संक्रमितों का उपचार चल रहा है।
एक सुई का दोबारा इस्तेमाल खतरनाक
टैटू मशीन में एक या कई सुइयों वाली कार्ट्रिज लगती है, जो त्वचा की दूसरी परत डर्मिस तक पहुंचती है। दूषित सुई या उपकरण दोबारा इस्तेमाल होने पर संक्रमण फैल सकता है। इसलिए हर ग्राहक के लिए नई सुई और कार्ट्रिज जरूरी है। दोबारा इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का आटोक्लेव से डिसइन्फेक्शन (कीटाणुरहित करना) होना चाहिए और इस्तेमाल की गई सुइयों का सुरक्षित निस्तारण जरूरी है।
दिल्ली में नियमन पर भी सवाल
व्यावसायिक स्रोतों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक दिल्ली में करीब 1,722 टैटू आर्टिस्ट और 467 टैटू शॉप थीं। इनमें बड़े स्टूडियो से छोटी दुकानें तक शामिल हैं। सड़क किनारे और पालिका बाजार जैसे स्थानों पर काम करने वाले अनौपचारिक आर्टिस्ट की संख्या 1,200 से अधिक बताई जाती है। हालांकि, इन आंकड़ों का कोई आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड नहीं है। मई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में भी टैटू उद्योग के नियमन और अनिवार्य लाइसेंस की मांग की गई है।
स्याही में भी स्वास्थ्य जोखिम
कर्नाटक में टैटू स्याही के नमूनों की जांच में 22 तरह की भारी धातुएं मिली थीं। राज्य ने स्याही के लिए राष्ट्रीय मानक और टैटू कारोबार के नियमन की जरूरत उठाई थी। कुछ शोधों में टैटू और लिम्फोमा के बीच संबंध की जांच हुई है, लेकिन टैटू को सीधे कैंसर का कारण साबित नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों के सुझाव
डॉ. मनीष जांगरा के अनुसार, टैटू केंद्रों का अनिवार्य पंजीकरण और नियमित स्वास्थ्य निरीक्षण हो। हर ग्राहक के लिए नई सुई, नया इंक कप और दस्ताने हों। स्याही पर सामग्री और निर्माता की जानकारी हो और बिना लेबल की स्याही पर रोक लगे। ग्राहक को संक्रमण, एलर्जी, दाग और कीलॉयड जैसे संभावित जोखिमों की जानकारी पहले दी जाए। केरल की लाइसेंस व्यवस्था की तरह देशभर में एक समान स्वास्थ्य-सुरक्षा मानक बनाने की जरूरत है।
