Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    दिल्ली IGI एयरपोर्ट का होगा विस्तार, वन विभाग ने 32 पेड़ों के प्रत्यारोपण को दी मंजूरी

    Updated: Tue, 24 Feb 2026 10:08 PM (IST)

    दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के विस्तार के लिए वन विभाग ने अहम फैसला लिया है। विभाग ने द्वारका में एयरपोर्ट की एप्रन सुविधाओं को बे ...और पढ़ें

    दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के विस्तार के लिए वन विभाग ने अहम फैसला लिया है। फाइल फोटो

    दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के विस्तार के लिए वन विभाग ने अहम फैसला लिया है। फाइल फोटो

    स्टेट ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने एक अहम फैसला लिया है। डिपार्टमेंट ने द्वारका इलाके में एयरपोर्ट की एप्रन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 32 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की इजाजत दी है, लेकिन किसी भी पेड़ को काटने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

    डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बताया कि अगर एजेंसी यह पक्का नहीं कर पाती कि पेड़ ज़िंदा रहें, तो डिपार्टमेंट सिक्योरिटी डिपॉज़िट का इस्तेमाल करके खुद पेड़ लगाने का काम करेगा। एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यह इजाज़त दो साल के लिए वैलिड है।

    फैसले की खास बातें

    • मकसद: यह इजाज़त एयरपोर्ट के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल एरिया के विस्तार के लिए है। एप्रन वह एरिया होता है, जहां एयरक्राफ्ट पार्क किए जाते हैं और उनमें फ्यूल भरा जाता है या उनकी रिपेयर की जाती है।
    • सख्त नियम: एप्लीकेशन में 34 पेड़ हटाने की रिक्वेस्ट की गई थी, लेकिन इंस्पेक्शन के बाद डिपार्टमेंट ने सिर्फ 32 पेड़ों के ट्रांसप्लांट को मंज़ूरी दी।
    • कम्पेनसेटरी प्लांटेशन: नियमों के मुताबिक, हटाए गए पेड़ों की संख्या से 10 गुना, यानी 320 नए पेड़, IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 के सामने 'न्यू उड़ान भवन' में लगाए जाएंगे। इन पेड़ों की अगले कई सालों तक देखभाल करनी होगी।

    मॉनिटरिंग और शर्तें

    फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस प्रोसेस के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:

    • सिक्योरिटी डिपॉजिट: संबंधित एजेंसी ने ट्रांसप्लांटेशन और नियमों के पालन के लिए ₹18.24 लाख का सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा किया है।
    • जियो-टैगिंग: हर ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ की जियो-टैगिंग ज़रूरी है। समय-समय पर प्रोग्रेस रिपोर्ट फोटोग्राफ के साथ डिपार्टमेंट के पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
    • वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन: अगर किसी पेड़ पर कोई एक्टिव चिड़िया का घोंसला या कोई दूसरा वाइल्डलाइफ मिलता है, तो उसे दोबारा नहीं लगाया जाएगा।
    • दूरी का स्टैंडर्ड: ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों के बीच चार मीटर और नए पौधों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी रखनी होगी।

    यह भी पढ़ें: JNU के स्कूलों में तालाबंदी, प्रोफेसरों को निकालने के लिए बुलानी पड़ी पुलिस; कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

    खबरें और भी