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आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी कम, हर पांच विद्यार्थियों में केवल एक छात्रा 

Updated: Tue, 18 Aug 2026 05:58 PM (IST)

आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग की यूजी कक्षाओं में छात्राओं की भागीदारी पिछले सात वर्षों में 20-21% पर स्थिर है। शोध और पीजी स्तर पर महिला भागीदारी बेहतर है, लेकिन यूजी प्रवेश में लैंगिक अंतर चुनौती बना हुआ है।

आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी कम।

आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी कम।

HighLights

  1. आईआईटी दिल्ली में यूजी छात्राओं की भागीदारी 20-21% पर स्थिर

  2. सात वर्षों में हिस्सेदारी में केवल 0.73% की मामूली वृद्धि

  3. शोध और पीजी स्तर पर महिला भागीदारी अपेक्षाकृत बेहतर

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी अब भी पुरुष विद्यार्थियों की तुलना में काफी कम है। यूजी स्तर पर सात वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि छात्राओं की संख्या बढ़ने के बावजूद कुल प्रवेश में उनकी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत के आसपास ही है। यानी आईआईटी दिल्ली की यूजी कक्षाओं में अभी भी हर पांच विद्यार्थियों में केवल एक छात्रा पहुंच रही है। यह स्थिति तकनीकी शिक्षा में लैंगिक संतुलन की चुनौती को रेखांकित करती है।

आईआईटी दिल्ली की वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार, 2020-21 में कुल 1,197 यूजी विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जिनमें 245 छात्राएं थीं। कुल प्रवेश में छात्राओं की हिस्सेदारी 20.47 प्रतिशत थी। 2021-22 में 1,215 यूजी प्रवेश में 249 छात्राएं रहीं और उनकी हिस्सेदारी 20.49 प्रतिशत हुई। 2022-23 में 1,226 विद्यार्थियों में 253 छात्राएं थीं। इस वर्ष महिला भागीदारी 20.64 प्रतिशत रही। 2023-24 में कुल 1,231 यूजी प्रवेश में 254 छात्राएं थीं और हिस्सेदारी 20.63 प्रतिशत रही। 2024-25 में 1,226 विद्यार्थियों में 252 छात्राएं दाखिल हुईं, जिससे महिला भागीदारी 20.55 प्रतिशत रही।

2026-27 के आंकड़ों में छात्राओं की संख्या बढ़कर 264 हुई है। इस वर्ष कुल 1,245 यूजी प्रवेश हुए हैं और छात्राओं की हिस्सेदारी 21.20 प्रतिशत रही। यानी 2020-21 के मुकाबले छात्राओं की संख्या में 19 की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कुल प्रवेश में हिस्सेदारी केवल 0.73 प्रतिशत अंक बढ़ी है। आंकड़ों से साफ है कि छात्राओं की संख्या में वृद्धि के बावजूद उनकी भागीदारी की रफ्तार धीमी है।

शोध में तस्वीर बेहतर, यूजी में अंतर कायम

यूजी के मुकाबले शोध और पीजी स्तर पर महिला भागीदारी अपेक्षाकृत बेहतर है। 2024-25 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लेने वाले 671 नए शोधार्थियों में 249 महिलाएं थीं। यानी शोध में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 37.1 प्रतिशत रही। इसी वर्ष पीजी स्तर पर 1,484 नए विद्यार्थियों में 360 छात्राएं थीं, जो करीब 24.3 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि उच्च स्तर की शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन यूजी स्तर पर प्रवेश के समय ही बड़ा अंतर दिखाई देता है।

छात्राओं की हिस्सेदारी बढ़ाना बड़ी चुनौती

सात वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि आईआईटी दिल्ली में यूजी स्तर पर छात्राओं की भागीदारी 20-21 प्रतिशत के दायरे में ही बनी हुई है। 2026-27 में इसमें मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन हर पांच में चार विद्यार्थियों के पुरुष होने की स्थिति अब भी बनी हुई है। ऐसे में तकनीकी शिक्षा में लैंगिक संतुलन के लिए केवल छात्राओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कुल यूजी प्रवेश में उनकी हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है।

आंकड़ों पर एक नजर

शैक्षणिक वर्ष कुल यूजी प्रवेश छात्राएं हिस्सेदारी
2020-21 1,197 245 20.47%
2021-22 1,215 249 20.49%
2022-23 1,226 253 20.64%
2023-24 1,231 254 20.63%
2024-25 1,226 252 20.55%
2026-27 1,245 264 21.20%

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