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    दिन की लू ही नहीं, अब रात की गर्मी भी बन रही है 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी'; एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 12:20 PM (IST)

    भारतीय शहरों में 'नाइट हीट स्ट्रेस' एक गंभीर चुनौती बन गया है, जहां रातें दिन की तुलना में तेजी से गर्म हो रही हैं। इससे लोगों की नींद और स्वास्थ्य पर ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर, एआई जनरेटेड।

    सांकेतिक तस्वीर, एआई जनरेटेड।

    HighLights

    1. भारतीय शहरों में रातें दिन से अधिक तेजी से गर्म हो रही हैं।

    2. नाइट हीट स्ट्रेस से नींद और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बुरा असर।

    3. शहरीकरण से बिजली की मांग बढ़ी, हरित क्षेत्र घट रहे हैं।

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच भारतीय शहरों में रात के समय बढ़ती गर्मी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में अब रातें दिनों की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रही हैं, जिससे लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।

    एक हालिया अध्ययन के अनुसार, कंक्रीट के बढ़ते जंगल, सिकुड़ते हरित क्षेत्र और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव के कारण शहर दिनभर की गर्मी को अपने भीतर समेट लेते हैं और रात के दौरान धीरे-धीरे उसे छोड़ते हैं। इसके चलते लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

    कई शहरों में बढ़ीं बेहद गर्म रातें

    अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2012 से 2022 के बीच कई प्रमुख भारतीय शहरों में अत्यधिक गर्म रातों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। अहमदाबाद में सबसे अधिक 15 अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज हुईं, जबकि मुंबई में 11, बेंगलुरु में 8, जयपुर में 7, दिल्ली में 6 और चेन्नई में 4 अतिरिक्त गर्म रातें रेकार्ड की गईं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय तापमान में यह बढ़ोतरी लोगों की शारीरिक रिकवरी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, क्योंकि शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने के लिए ठंडे वातावरण की आवश्यकता होती है।

    दिल्ली में ‘नाइट अर्बन हीट आइलैंड’ का असर

    रिपोर्ट में दिल्ली को उन शहरों में शामिल किया गया है जहां रात के समय शहरी तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में दो से चार डिग्री सेल्सियस अधिक पाया गया। वहीं, दिल्ली में नाइट अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव की तीव्रता चार से छह डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर है, जहां खुले स्थानों और हरित क्षेत्रों की कमी के कारण गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है।

    नींद और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

    चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय अधिक तापमान रहने से शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया बाधित होती है। इससे लोगों की नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और लंबे समय में उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्याएं, थकान तथा अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

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    विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गर्म रातें शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।

    बिजली की मांग में भी हो रही वृद्धि

    बढ़ती गर्म रातों का असर बिजली खपत पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में हाल के वर्षों में बिजली की मांग रेकार्ड स्तर तक पहुंची है। रात के समय एयर कंडीशनर और अन्य शीतलन उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शहरों में हरित क्षेत्रों का संरक्षण, बेहतर शहरी नियोजन और प्राकृतिक वेंटिलेशन को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति की तरह देखने की जरूरत

    पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत में अब केवल दिन की लू ही नहीं, बल्कि रात की बढ़ती गर्मी को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की संख्या बढ़ाने, खुले स्थानों को संरक्षित करने और तापमान कम करने वाली शहरी नीतियों को लागू करने की जरूरत है, ताकि बढ़ते नाइट हीट स्ट्रेस के प्रभाव को कम किया जा सके।