पांडवों से गुप्त काल तक के दिखेंगे अवशेष, दिल्ली समेत देश में 15 स्थानों के लिए ASI का खास प्लान
भारत के गौरवशाली अतीत को सजीव रूप में प्रस्तुत करने के लिए एएसआई 15 ऐतिहासिक खोदाई स्थलों पर अत्याधुनिक संग्रहालय बनाएगा। इनमें दिल्ली का पुराना किला भी शामिल है।

दिल्ली के पुराना किला में भी बनेगा हाई टेक संग्रहालय। फोटो: आर्काइव
HighLights
15 ऐतिहासिक खोदाई स्थलों पर बनेंगे अत्याधुनिक संग्रहालय
दिल्ली का पुराना किला भी इस परियोजना में शामिल
तीन वर्षों में पूरा होगा 1400 करोड़ का यह प्रोजेक्ट
वीके शुक्ला, नई दिल्ली। भारत के गौरवशाली अतीत, प्राचीन सभ्यताओं और जमीन के नीचे दबे सांस्कृतिक रहस्यों को आम जनता के सामने सजीव रूप में लाने के लिए देश के 15 ऐतिहासिक खोदाई स्थलों पर हाई-टेक संग्रहालय बनेंगे।
इन खोदाई स्थलों पर संबंधित विषयों को लेकर फिल्में बनाकर उन्हें दिखाए जाने की भी एएसआई की योजना है। इस सूची में दिल्ली का पुराना किला भी शामिल है।
देश योजना के तहत इन सभी स्थलों पर अत्याधुनिक पुरातात्विक संग्रहालयों से देश-विदेश के पर्यटकों और शोधार्थियों को इतिहास को उसी स्थान पर महसूस करने का अवसर मिलेगा, जहां से उसके अवशेष प्राप्त हुए हैं।
एएसआई का यह पहला प्रयोग होगा
एएसआई के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा संरचनात्मक प्रयोग है। विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए आधिकारिक रूप से टेंडर जारी कर दिए हैं।
इस पूरी परियोजना पर अनुमानित 1400 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी। परियोजना की संवेदनशीलता, विभिन्न कालों की विविधताओं और ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए एएसआई ने रणनीति बनाई है कि प्रत्येक खोदाई स्थल के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे।
तीन वर्ष में संग्रहालय तैयार हो जाएंगे
ये सलाहकार संग्रहालयों के विशिष्ट डिजाइन, कलाकृतियों के वैज्ञानिक संरक्षण और उनके प्रदर्शन की रूपरेखा तय करेंगे। एएसआई की कार्ययोजना के मुताबिक इन सभी अत्याधुनिक संग्रहालयों को अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह से बनाकर तैयार करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।
ये पुरातात्विक संग्रहालय न केवल आम भारतीय नागरिकों और पर्यटकों का ज्ञान बढ़ाएंगे, बल्कि देश के विरासत पर्यटन को वैश्विक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई देंगे। दुनिया भर के इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और शोधार्थियों के लिए ये 15 स्थल किसी बड़े अकादमिक वरदान से कम नहीं होंगे।
अब तक इतिहास की किताबों में सिमटे रहने वाले तथ्यों को लोग अपनी आंखों के सामने बिल्कुल सजीव और वैज्ञानिक रूप में देख और समझ सकेंगे।
योजना में दिल्ली का पुराना किला भी शामिल
इस ऐतिहासिक परियोजना में देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक पुराना किला परिसर भी प्रमुखता से शामिल है। पुराना किला में पांडवों की प्राचीन राजधानी इंद्रप्रस्थ की खोज और उसके साक्ष्यों को पुख्ता करने के लिए लंबे समय से वैज्ञानिक खोदाई चल रही है।
यहां से मौर्य काल, गुप्त काल, राजपूत काल और सल्तनत काल से लेकर मुगल काल तक के बेहद महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना किला परिसर में बनने वाला यह ऑन-साइट संग्रहालय महाभारत कालीन संस्कृति और दिल्ली के क्रमिक ऐतिहासिक विकास को समझने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और प्रामाणिक केंद्र बनकर उभरेगा।
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