विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवाओं की तेजी से बढ़ रही संख्या

Published: Wed, 01 Apr 2026 08:02 PM (IST)

भारत में हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बदल रहा है, युवा इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रहे हैं। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated 

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारत में हार्ट अटैक के खतरे का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और यह अब हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवा सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं।

इस तरह के बढ़ते मामले सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में इसे लेकर हुए अध्ययन मे’ सामने आया है कि करीब 80 प्रतिशत ऐसे मरीज जिन्हें पहले मेडिकल जांच में ‘लो-रिस्क’ माना गया था, वे बाद में हार्ट अटैक का शिकार हो गए।

Heart Attack (1)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में हर वर्ष होने वाली करीब एक करोड़ मौत का लगभग 25 से 27 प्रतिशत यानी करीब 25 से 27 लाख मौत कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (सीवीडी) के कारण होती हैं, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति की मौत दिल से जुड़ी बीमारी से होती है। साफ है कि हार्ट अटैक देश में यह एक ‘साइलेंट महामारी’ बनता जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा खतरा अब युवाओं के सामने है।

2022 में हार्ट अटैक से सडन डेथ के 32,457 मामले दर्ज

देश में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के आंकड़े भी बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से सडन डेथ के 32,457 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 35 हजार से अधिक हो गई। इस मामले में वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े अभी तक जारी नहीं हुए हैं।

असंतुलित खानपान और तनाव से बढ़ रहा जोखिम

दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलाजिस्ट डॉ. मोहित दयाल गुप्ता के नेतृत्व में 2023 से 2025 के बीच एकत्रित मरीजों के डाटा पर आधारित हुआ क्लिनिकल विश्लेषण भारत में हार्ट डिजीज के बदलते पैटर्न को दर्शाता है।

हार्ट अटैक का शिकार होने वाले 20–30 वर्ष के युवाओं की संख्या पांच से 10 प्रतिशत के बीच है। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है, साथ ही इस उम्र में भी अचानक और बिना चेतावनी के हार्ट अटैक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

30 से 40 वर्ष की उम्र में यह खतरा और बढ़ जाता है, जहां तनाव, अनियमित दिनचर्या, मोटापा और शुरुआती डायबिटीज प्रमुख कारण बनते हैं। जबकि 40 से 50 वर्ष की आयु में इस तरह के लगभग 25 प्रतिशत मामले सामने आए। 50 से 60 वर्ष का वर्ग अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित (30 से 35 प्रतिशत) बना हुआ है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु दर सबसे अधिक देखी जाती है।

हार्ट अटैक के लक्षण

दिल्ली की स्थिति भी चिंताजनक है। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) व अन्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में दिल और रक्त संचार संबंधी बीमारियों से 34 हजार से अधिक मौतें दर्ज की गईं जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज बढ़ोतरी दर्शाती हैं। पिछले दो दशकों में दिल्ली में तीन लाख से ज्यादा लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण जान गंवा चुके हैं।

विशेषज्ञ इसके पीछे प्रदूषण, तनावपूर्ण जीवनशैली, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को प्रमुख कारण मानते हैं। यह भी सामने आया कि पश्चिमी देशों के आधार पर तैयार किए गए रिस्क कैलकुलेटर भारत के लिए पूरी तरह से कारगर नहीं हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अलग हार्ट रिस्क आंकलन माडल विकसित करने की जरूरत है। साथ ही लोगों को ‘नार्मल रिपोर्ट’ के भरोसे न रहकर नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।