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जन्माष्टमी ने बढ़ाई बाजार की रौनक, 30% बढ़ सकता है कारोबार; 40 हजार करोड़ का अनुमान

Published: Thu, 03 Sep 2026 11:06 AM (IST)

कैट के अनुसार, इस जन्माष्टमी पर देश में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने का अनुमान है, ...और पढ़ें

जनमाष्टमी की तैयारियों में गुलजार हैं घर-बार, कारोबार और मंदिर। एआई इमेज

जनमाष्टमी की तैयारियों में गुलजार हैं घर-बार, कारोबार और मंदिर। एआई इमेज

HighLights

  1. जन्माष्टमी पर 40 हजार करोड़ से अधिक व्यापार का अनुमान।

  2. पिछले वर्षों की तुलना में व्यापार में 30% की वृद्धि।

  3. 'वोकल फॉर लोकल' और धार्मिक पर्यटन से आर्थिक लाभ।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रक्षाबंधन पर बने रिकाॅर्ड व्यापार के बाद अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर देश के बाजारों में भारी चहल-पहल देखी जा रही है। व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस वर्ष जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ से अधिक के व्यापार होने का अनुमान जताया है।

व्यापार में 30 प्रतिशत की भारी वृद्धि

कैट के अनुसार, यह आंकड़ा न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि भारत की जमीनी और समावेशी 'सनातन अर्थव्यवस्था' की जीवंत शक्ति का भी प्रतीक है। कैट के अध्ययन के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखने को मिल रही है।

वर्ष 2024 में जन्माष्टमी पर करीब 25 हजार करोड़ और 2025 में लगभग 30 हजार करोड़ का कारोबार हुआ था। कैट के अनुसार, इस वर्ष उपभोक्ता मांग में उछाल, धार्मिक पर्यटन के विस्तार और स्वदेशी वस्तुओं की बढ़ती लोकप्रियता के कारण यह आंकड़ा 40 हजार करोड़ के पार जाने की उम्मीद है।

'वोकल फाॅर लोकल' का व्यापक असर

बाजारों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फार लोकल’ के आह्वान का स्पष्ट प्रभाव दिख रहा है। पूजा सामग्री, सजावटी सामान, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले, मुकुट, बांसुरी और पोशाकों की मांग में स्वदेशी उत्पादों का दबदबा है। इससे स्थानीय कारीगरों, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

किस क्षेत्र में कितना व्यापार (अनुमानित हिस्सेदारी)

व्यापार क्षेत्र

हिस्सेदारी (प्रतिशत में)

मिठाई, माखन-मिश्री एवं डेयरी उत्पाद

20

धार्मिक पर्यटन, होटल एवं परिवहन सेवाएं

15

फूल, मालाएं एवं सजावट सामग्री

12

पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती एवं पंचामृत किट

10

पारंपरिक परिधान एवं वस्त्र

10

फल, सूखे मेवे एवं प्रसाद सामग्री

10

अन्य विविध उपभोक्ता वस्तुएं

10

लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले एवं श्रृंगार

8

उपहार, खिलौने एवं घरेलू सजावटी सामान

5

कुल

100%

धार्मिक पर्यटन और सेवा क्षेत्र को भी पंख

मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर और अहमदाबाद जैसे प्रमुख कृष्ण धामों में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इससे होटल, रेस्त्रां, कैब सर्विस, स्थानीय हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं से जुड़े लोगों को बड़ा रोजगार मिल रहा है।

कैट का मानना है कि भारतीय त्योहार केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि ये मंदिर से बाजार और किसान से व्यापारी तक को एक आर्थिक श्रृंखला में जोड़ते हैं। जन्माष्टमी का यह पर्व भक्ति के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आजीविका और राष्ट्रीय विकास को गति देने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।

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