केजरीवाल के सवालों पर दिल्ली HC के जवाब, जिरह के दौरान किसने क्या कहा? कोर्ट में हुई बहस की पूरी कहानी
अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की सुनवाई से अलग होने की मांग की, जिसमें उन्होंने निष्पक्षता पर सवाल उठाए। अदालत ने केजरीवाल के तर्क ...और पढ़ें
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अरविंद केजरीवाल के सवालों पर कोर्ट के तर्कपूर्ण जवाब। फोटो: आर्काइव
HighLights
केजरीवाल ने न्यायाधीश की सुनवाई से अलग होने की मांग की
अदालत ने निष्पक्षता पर उठाए सवालों का तर्कपूर्ण जवाब दिया
आरएसएस कार्यक्रम में न्यायाधीश की उपस्थिति पर चिंता जताई गई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को सुनवाई से अलग करने की मांग वाली अर्जी पर अरविंद केजरीवाल ने लंबी जिरह की। एक तरफ केजरीवाल ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई होने पर आशंका व्यक्त की, तो दूसरी तरफ अदालत ने तर्कों के साथ प्रतिक्रिया की। दोनों के बीच हुई जिरह के प्रमुख अंश।
केजरीवाल: नौ मार्च को केवल सीबीआई की एक याचिका थी और ट्रायल कोर्ट का आदेश था। ट्रायल कोर्ट का रिकाॅर्ड भी नहीं था तो क्या आदेश देना जरूरी है? इसकी जरूरत और आपात स्थिति क्या थी? इसके कारण शंका पैदा हुई।
कोर्ट: यह सवाल आप नहीं कर सकते कि आदेश देने की क्या जरूरत थी। आप (केजरीवाल) मुझे (अदालत) नहीं बताएं मैंने आदेश कैसे लिखा, ये आप सुप्रीम कोर्ट को बता सकते हैं।
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केजरीवाल: इस कोर्ट ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, उससे भी भेदभाव का पता चला। कोर्ट के पास एमपी-एमएलए का रोस्टर- जनवरी को आया था। उसके बाद हमने रिवीजन पिटीशन एनालाइज की हैं। कोई और केस इस तेजी से नहीं चल रहा है। ये दोनों मामले सबसे बड़े राजनीतिक विरोधियों के हैं।
कोर्ट: तो आप राजनीतिक भेदभाव का इशारा कर रहे हैं?
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केजरीवाल: एक मामले की सुनवाई में अदालत ने तीन महीने का समय दिया गया और दूसरे केस में छह महीने का समय, जबकि हमारे मामले में जवाब दाखिल करने का अधिकार बंद कर दिया गया।
कोर्ट: अभी अधिकार बंद नहीं किए गए हैं।
केजरीवाल: अगली सुनवाई तक जवाब नहीं दाखिल करने पर अधिकार बंद करने का निर्देश दिए गए थे।
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केजरीवाल: आरएसएस की एक इकाई है अधिवक्ता परिषद्। इसके कार्यक्रम में न्यायमूर्ति स्वयं चार बार गई हैं। यह भी कहा कि आरएसएस की विचारधारा के हम सख्त खिलाफ हैं और ये केस राजनीतिक केस है। यदि आप किसी विशेष विचारधारा के कार्यक्रम में भाग ले रही हैं, तो उचित पूर्वाग्रह पैदा होता है। धारणा है कि क्योंकि मैं विपरीत विचारधारा का हूं, तो मुझे न्याय मिलेगा या नहीं।
कोर्ट: जब मैं उस प्रोग्राम में गई थी तो क्या मैंने कोई राजनीतिक बयान दिया था या वैचारिक बयान दिया था या फिर वह कोई लीगल प्रोग्राम था? सिर्फ इस बात से कि मैं गई थी और प्रोग्राम में शामिल हुआ थी, इससे शक पैदा होता है।
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केजरीवाल: अभी गृहमंत्री ने बयान दिया कि हाई कोर्ट जो भी आदेश देगा, उसके खिलाफ मैं सुपीम कोर्ट में अपील करूंगा।
अदालत: वह (गृह मंत्री) या आप (केजरीवाल) जो कहते हैं, उस पर मेरा क्या नियंत्रण है?