LPG Connection के बाद भी गरीबों की रसोई से नहीं हटा लकड़ी का धुआं, 70% शहरी ही पूरी तरह गैस पर निर्भर
देश में गरीब परिवारों तक एलपीजी की पहुंच तो बढ़ी है, पर महंगा रीफिल और औपचारिक कनेक्शन की कमी के ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
एलपीजी की पहुंच बढ़ी, पर नियमित उपयोग में बाधाएं।
महंगा रीफिल और औपचारिक कनेक्शन मुख्य चुनौती बने।
सब्सिडी बढ़ाने और पंजीकरण सरल करने की सिफारिश की गई।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में गरीब परिवारों तक एलपीजी की पहुंच तेजी से बढ़ी है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी भी नियमित और पूरी तरह स्वच्छ ईंधन के रूप में इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
काउंसिल आन एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के सोमवार को ही जारी तीन अध्ययनों के मुताबिक, 70 प्रतिशत शहरी गरीब परिवार और 23 प्रतिशत ग्रामीण परिवार खाना पकाने के लिए सिर्फ एलपीजी पर निर्भर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के 73 प्रतिशत, शहरी अनौपचारिक बस्तियों के 87 प्रतिशत और 74 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं।
छह राज्यों के 2,200 से अधिक ग्रामीण परिवारों, शहरी अनौपचारिक बस्तियों के 1,100 से अधिक परिवारों और 10 शहरों के 1,000 से अधिक प्रवासी श्रमिकों के सर्वेक्षण से पता चला कि एलपीजी की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद औपचारिक कनेक्शन और नियमित रीफिल में बड़ी खाई है।
प्रवासी सबसे ज्यादा वंचित
प्रवासी श्रमिकों की स्थिति सबसे कमजोर है। एलपीजी इस्तेमाल करने वाले 79 प्रतिशत प्रवासियों के पास औपचारिक कनेक्शन नहीं मिला। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाइ) में पंजीकरण आसान करने के लिए 2021 में नियम बदले गए थे, फिर भी सर्वेक्षण में शामिल चार प्रतिशत से कम प्रवासी ही योजना से जुड़े मिले।
अनौपचारिक रूप से एलपीजी खरीदने वाले प्रवासी करीब 71 रुपये प्रति किलो चुकाते हैं, जबकि औपचारिक कनेक्शन पर यह करीब 59 रुपये है।
400 रुपये हो रीफिल तो बढ़ेगा इस्तेमाल
तीनों समूहों में एलपीजी की कीमत सबसे बड़ी चुनौती सामने आई। कम से कम 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि 14.2 किलो के सिलेंडर का रीफिल 400 रुपये हो जाए तो वे केवल एलपीजी का इस्तेमाल करेंगे।
तीनों समूहों में भुगतान करने की इच्छा की मध्य कीमत 500 रुपये रही, जो पीएमयूवाई सब्सिडी के बाद करीब 642 रुपये की प्रभावी कीमत से भी कम है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आधे परिवार अब भी मुख्य ईंधन के तौर पर लकड़ी पर निर्भर हैं। एलपीजी इस्तेमाल करने वालों में केवल 47 प्रतिशत को घर तक सिलेंडर पहुंचता है। शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 31 प्रतिशत परिवारों ने निवास प्रमाण जैसे दस्तावेज न होने को कनेक्शन न मिलने की वजह बताया।
बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 11 प्रतिशत परिवार अनौपचारिक बाजार से सिलेंडर खरीदते हैं और उन्हें खुदरा कीमत से काफी अधिक भुगतान करना पड़ता है।
कनेक्शन से आगे बढ़े नीति
सीईईडब्ल्यू ने एलपीजी को वास्तव में गरीबों का नियमित ईंधन बनाने के लिए पीएमयूवाइ सब्सिडी में करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ोतरी, प्रवासियों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान और लचीले भुगतान वाले एलपीजी कियोस्क का पायलट सुझाया है।
ग्रामीण इलाकों में घर तक डिलीवरी बढ़ाने के लिए दूरदराज के ग्राहकों तक पहुंचने वाले वितरकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने और शहरी गरीबों के लिए दस्तावेजी बाधाएं कम करने की सिफारिश की गई है।
सीईईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बोरा ने कहा कि एलपीजी कनेक्शन देना पहला कदम है; असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि परिवार नियमित रीफिल खरीद सकें और सिलेंडर भरोसेमंद तरीके से उन तक पहुंचता रहे।
