जामा मस्जिद परिसर में MCD का बड़ा एक्शन, हटाए गए अवैध कब्जे और अस्थायी निर्माण
एमसीडी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर जामा मस्जिद परिसर और आसपास के सार्वजनिक स्थानों से अवैध अतिक्रमण हटाए। ...और पढ़ें

जामा मस्जिद परिसर में अवैध कब्जों पर एमसीडी का चला बुलडोजर। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
एमसीडी ने जामा मस्जिद परिसर से अतिक्रमण हटाए।
दिल्ली उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों पर कार्रवाई।
तीन प्रमुख पार्कों से अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ऐतिहासिक मुगलकालीन जामा मस्जिद परिसर व आसपास सार्वजनिक स्थानों और पार्कों से अतिक्रमण हटाने के लिए एमसीडी ने सोमवार को बड़ा अभियान शुरू किया। दिल्ली उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद हुई इस कार्रवाई में एमसीडी की टीमें हथौड़े के साथ सुबह ही मौके पर पहुंचकर तीन प्रमुख पार्कों और आसपास की सार्वजनिक सड़कों पर किए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारी भीड़ के साथ किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल मौजूद रहे।
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें ऐतिहासिक जामा मस्जिद परिसर और आसपास की सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों, अवैध पार्किंग, अवैध वेंडर स्टाल और बिना अनुमति चल रहे व्यावसायिक ढांचों का मुद्दा उठाया गया था। हाईकोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिए थे कि वह पूरे क्षेत्र का व्यापक सर्वे करे और अवैध कब्जों को हटाने के लिए नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई करे।
उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए सोमवार तड़के एमसीडी का दस्ता बुलडोजर और रखरखाव टीमों के साथ जामा मस्जिद के आसपास पहुंचा तथा जामा मस्जिद परिसर व उससे सटे तीन बड़े पार्कों से अवैध अस्थायी शेड, दुकानें और अनधिकृत संरचनाएं हटाई गईं। एमसीडी प्रवक्ता के अनुसार, यह कार्रवाई मामले से जुड़े सभी पक्षकारों के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और वर्तमान में मलबे को हटाने का काम जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था चुस्त, आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
जामा मस्जिद क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ एक व्यस्त व्यावसायिक और संवेदनशील इलाका है, इसलिए पुलिस व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती बरकरार है। एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा, ताकि ऐतिहासिक धरोहर की भव्यता बनी रहे और सार्वजनिक पार्कों को आम जनता के लिए पूरी तरह कब्जामुक्त कराया जा सके।
