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दिल्ली में अब ड्रोन बताएगा आपकी संपत्ति का असली 3D आकार, 3-4 मंजिल छिपाकर प्रॉपर्टी टैक्स देने वालों की खैर नहीं

Published: Tue, 22 Sep 2026 09:31 PM (IST)

एमसीडी ने संपत्ति कर चोरी रोकने के लिए ड्रोन से संपत्तियों की थ्रीडी मैपिंग शुरू की है। इससे कम कर ...और पढ़ें

एमसीडी ने ड्रोन से सर्वे के जरिये संपत्तियों की थ्रीडी मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया है। एआई इमेज

एमसीडी ने ड्रोन से सर्वे के जरिये संपत्तियों की थ्रीडी मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया है। एआई इमेज

HighLights

  1. एमसीडी ने ड्रोन से संपत्तियों की थ्रीडी मैपिंग शुरू की।

  2. कर चोरी करने वालों को अब पूरा बकाया चुकाना होगा।

  3. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो वार्ड में लागू किया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एमसीडी को संपत्तिकर से राजस्व में चूना लगाने वाले लोगों को आने वाले समय में पुराना बकाया भी चुकाना पड़ेगा। साथ ही, तीन से चार मंजिल की संपत्ति को एक मंजिल की दिखाकर कर चुकाने वालों को भी पूरा कर चुकाना होगा।

इसके लिए एमसीडी ने ड्रोन से सर्वे के जरिये संपत्तियों की थ्रीडी मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया है। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो वार्ड से यह सर्वे शुरू किया गया है। इसके सफल परिणाम आने के बाद एमसीडी के सभी 250 वार्ड में इसे लागू किया जाएगा।

थ्रीडी सर्वेक्षण का किन योजनाओं में मिलेगा लाभ?

एमसीडी के अनुसार, रोहिणी एफ और घरोली वार्ड में संपत्ति कर निर्धारण व्यवस्था को अधिक सटीक, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए ड्रोन आधारित थ्रीडी सर्वेक्षण की पायलट परियोजना शुरू की है।

इसके तहत संपत्तियों का हवाई सर्वेक्षण कर जीआईएस और डिजिटल ट्विन तैयार किया जाएगा। निगम के अनुसार, सर्वेक्षण में ड्रोन और हवाई सर्वेक्षण के साथ लिडार आधारित मैपिंग, जीआईएस, एआई और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण, जियो टैगिंग और थ्रीडी डिजिटल माॅडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

वास्तविक निर्मित क्षेत्र की मिलेगी पूरी रिपोर्ट

एमसीडी के अनुसार ड्रोन सर्वेक्षण से ऐसी संपत्तियों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनका अभी तक संपत्ति कर निर्धारण नहीं हुआ है। इसके अलावा कम कर निर्धारित वाली संपत्तियों को भी चिन्हित किया जा सकेगा।

निगम को गलत तरीके से मैप की गई या डुप्लीकेट संपत्ति संबंधी जानकारी की पहचान में भी मदद मिलेगी। सर्वेक्षण के जरिए मौजूदा रिकाॅर्ड में दर्ज निर्माण और मौके पर मौजूद वास्तविक निर्मित क्षेत्र के बीच अंतर का पता लगाया जाएगा।

अतिरिक्त मंजिलों या ऐसे निर्माण की भी पहचान हो सकेगी, जो निगम के मौजूदा संपत्ति रिकार्ड में दर्ज नहीं हैं। इससे घोषित और वास्तविक बिल्ट-अप एरिया की तुलना करना आसान होगा।

नागरिकों को भी मिलेगा लाभ

निगम का कहना है कि इस पहल से नागरिकों को संपत्ति अभिलेखों और कर निर्धारण में अधिक पारदर्शिता मिल सकेगी। जियो टैग की गई संपत्ति संबंधी जानकारी उपलब्ध होने से रिकार्ड की सटीकता बढ़ेगी।

अधिकारियों के साथ भौतिक संपर्क और मैनुअल निरीक्षण में कमी आने की उम्मीद है। जीआईएस आधारित व्यवस्था के जरिए शिकायतों के निस्तारण को भी तेज किया जा सकेगा।

निगम ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन सर्वेक्षण तकनीकी मानचित्रण और सत्यापन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जाएगा। सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल लागू नियमों के अनुरूप संपत्ति कर निर्धारण और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाएगा।

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