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    MCD संपत्तिकर लक्ष्य से 400 करोड़ पीछे, माफी योजना के बावजूद 3116 करोड़ ही वसूले

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 11:01 PM (IST)

    एमसीडी का संपत्ति कर राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 46% बढ़कर ₹3116 करोड़ हो गया, फिर भी ₹3500 करोड़ के लक्ष्य से ₹400 करोड़ कम रहा। 'सुनियो' योजना ने ...और पढ़ें

    एमसीडी का संपत्ति कर राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 46% बढ़कर ₹3116 करोड़ हो गया। फाइल फोटो

    एमसीडी का संपत्ति कर राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 46% बढ़कर ₹3116 करोड़ हो गया। फाइल फोटो

    HighLights

    1. एमसीडी का संपत्ति कर राजस्व 46% बढ़ा, लक्ष्य से चूका।

    2. एनडीएमसी के संपत्ति कर राजस्व में भारी उछाल दर्ज।

    3. अनधिकृत कॉलोनियों को कर दायरे में लाना आवश्यक।

    निहाल सिंह, नई दिल्ली। सालभर संपत्ति मालिकों को बकाया संपत्तिकर पर छूट देने के बाद भी एमसीडी संपत्तिकर से राजस्व में तय लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं कर पाया है। भले ही निगम के संपत्तिकर से राजस्व में 46 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है लेकिन 3500 करोड़ के लक्ष्य से निगम 400 करोड़ दूर रह गया है।

    निगम को वित्त वर्ष 2025-26 में संपत्तिकर से 3116 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। जबकि निगम ने वर्ष 2024-25 में संपत्तिकर से राजस्व का 4000 करोड़ का लक्ष्य रखा था जो कि पूरा न होने की संभावना को देखते हुए इस लक्ष्य में 500 करोड़ की कटौती की गई थी।

    एमसीडी के अनुसार 3116 करोड़ का राजस्व 13,52,562 संपत्तिकर दाताओं से प्राप्त हुआ है। जबकि 2024-25 में एमसीडी को 1133161 करदाताओं से 2132.89 करोड़ का राजस्व मिला था।

    निगम के अनुसार संपत्ति कर माफी योजना 2025-26 संपत्तिकर निपटान योजना (सुनियो) में 2,06,861 करदाताओं 1236 करोड़ रुपये का संपत्तिकर मिला है। इसमें से 242.87 करोड़ रूपये 1.47 लाख से अधिक आवासीय संपत्तियों से तथा 993.52 करोड़ रुपये 59 हजार से अधिक गैर-आवासीय संपत्तियों से मिला है।

    इसके अतिरिक्त, 1,11,909 नए करदाताओं ने सुनियो योजना का लाभ उठाते हुए पहली बार संपत्ति कर का भुगतान किया है। जिससे 448.89 करोड़ रूपये का राजस्व मिला है। उल्लेखनीय है कि निगम के एकीकरण के बाद वर्ष 2023-24 में निगम को 2417 करोड़ का राजस्व मिला था लेकिन 2024-25 में यह 2132 करोड़ ही हो पाया था।

     अब भले ही उसे संपत्तिकर निपटान योजना से अतिरिक्त राजस्व मिला है लेकिन यह स्थायी नहीं है। इस राजस्व को स्थायी करने के लिए दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों में सभी संपत्ति मालिको को संपत्तिकर के दायरे में लाकर कार्य करना होगा। क्योंकि यहां पर 40 लाख से अधिक संपत्तियां हैं। जहां पर 4 से छह हजार करोड़ का राजस्व आने की संभावना है।

    खबरें और भी

    संपत्तिकर से राजस्व बढ़ाने के लिए उठाने होंगे यह कदम

    • नियमित और ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना
    • टैक्स न चुनाने वाले संपत्ति मालिकों पर कठोर कार्रवाई, साथ ही टैक्स न चुकाने पर लोगों में कार्रवाई का डर
    • अनधिकृत कालोनियो में मौजूद 40 लाख से अधिक संपत्तियों से टैक्स का कलेक्शन हो
    • संपत्तिकर निपटान के लिए बार-बार लाइ जाने वाली छूट खत्म हो
    • व्यावसायिक संपत्तियों से बकाया भुगतान के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरुरत
    एमसीडी को संपत्ति कर से प्राप्त राजस्व
    वित्त वर्ष संपत्तिकर मिला (करोड़ रुपये) संपत्तिकर दाता (लाखों में)
    2022-23 2417 13.29
    2023-24 2137 12.58
    2024-25 2132 11.33
    2025-26 3116 13.52

    एनडीएमसी में गुड गर्वनेंस का कमाल, राजस्व में जमकर उछाल

    नागरिकों को बिजली के बिल में पीपीएसी चार्ज कम होने पर हुआ 200 करोड़ का लाभ

    एक ओर एमसीडी अपने राजस्व के तय लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पा रही है लेकिन अपने आय और व्यय के लिए आत्मनिर्भर एनडीएमसी को संपत्तिकर से राजस्व में अच्छा खासा उछाल मिला है।

    वित्त वर्ष 2024-25 में एनडीएमसी को संपत्तिकर से 1040.33 करोड़ का राजस्व मिला था जबकि 2025-26 में 1396.82 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। जिसमें बड़ी संख्या में बकायेदारों को संपत्तिकर के लिए प्रदान की गई सहूलियत के कारण राजस्व में वृद्वि हुई है।

    एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने बताया कि हम एनडीएमसी में सुशासन माडल लागू कर रहे हैं। नागरिकों को बिना परेशान किए उनसे टैक्स लिया जाए। हमने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों को परेशान न किया जाए तो लोग बकाया चुकाने के लिए बड़ी संख्या में ज्यादा आए।

    एनडीएमसी इलाके में 16000 हजार करदाता है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष इससे ज्यादा राजस्व आएगा क्योंकि हम यूनिट एरिया मैथर्ड भी लागू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इससे लोगों पर कर तो कम होगा लेकिन जो लोग कर की दरें ज्यादा होने की वजह से संपत्तिकर नहीं देते थे वह अब देंगे।

    चहल ने बताया कि एनडीएमसी ने अक्टूबर से बिजली खरीद समयोजन शुल्क 50 प्रतिशत से कम होकर 8.75 प्रतिशत हो गया था। जिसकी वजह से एनडीएमसी में वित्त वर्ष 2024-25 में 1962 करोड़ की बजाय 2025-26 में सिर्फ 1735 करोड़ के बिल जारी हुए।

    इससे नागरिकों को 200 करोड़ के कम बिल जारी हुए। इसके एवज में एनडीएमसी को 2024-25 में 1892 करोड़ का राजस्व मिला था जो कि इस वर्ष 1776.79 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।

    एनडीएमसी को संपत्ति कर से प्राप्त राजस्व
    वित्त वर्ष प्राप्त राजस्व (करोड़ रुपये)
    2020-21 690.78
    2021-22 950.75
    2022-23 931.20
    2023-24 1025.59
    2024-25 1040.33
    2025-26 1396.82

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