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नमो भारत से पर्यावरण और परिवहन दोनों को फायदा, सड़कों पर घटीं एक लाख निजी गाड़ियां

Published: Mon, 17 Aug 2026 12:38 AM (GMT+05:30)Updated: Mon, 17 Aug 2026 05:34 AM (GMT+05:30)

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के परिचालन से दिल्ली-एनसीआर में परिवहन, शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण में बड़े सकारात्मक बदलाव आए हैं।

दैनिक एक लाख यात्री, निजी वाहन और प्रदूषण में कमी। इमेज एआई

दैनिक एक लाख यात्री, निजी वाहन और प्रदूषण में कमी। इमेज एआई

HighLights

  1. दैनिक एक लाख यात्री, निजी वाहन और प्रदूषण में कमी।

  2. रिवर्स माइग्रेशन और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा।

  3. 92% स्वदेशी तकनीक, सौर ऊर्जा से कॉरिडोर संचालन।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली-मेरठ नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर का पूरे रूट पर परिचालन शुरू होने के बाद से दिल्ली सहित एनसीआर में परिवहन, शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक बदलाव आए हैं। यह बात राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने जागरण से विशेष बातचीत में कही। उनके अनुसार, वर्तमान में इस आधुनिक रीजनल रेल सेवा से रोजाना करीब एक लाख यात्री सफर कर रहे हैं, जो इसकी बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, गाजियाबाद और मेरठ के कई इलाकों (जैसे मोदीनगर और बेगमपुल) से दिल्ली में नौकरी करने वाले लोग अब दैनिक आवागमन आसान होने के कारण वापस अपने मूल शहरों में रहने लगे हैं। इससे मेरठ एक प्रमुख आवासीय केंद्र के तौर पर उभरा है और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिला है। इसके साथ ही दोनों शहरों के मास्टर प्लान 2031 में 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (टीओडी) को शामिल किए जाने से स्टेशनों के आसपास आवासीय, कमर्शियल, शैक्षणिक और स्वास्थ्य परिसरों का समन्वित विकास हो रहा है।

बकौल गोयल, पर्यावरण के दृष्टिकोण से इस कारिडोर के परिचालन से रूट पर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल 37 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सड़कों से रोजाना लगभग एक लाख निजी गाड़ियां कम हुई हैं, जिससे सालाना 2.5 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। पूरी तरह बिजली से चलने वाली इन ट्रेनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के जरिए 30 प्रतिशत ऊर्जा वापस बनाई जा रही है।

वर्तमान में छतों और दुहाई डिपो के ट्रैक पर लगाए गए पैनलों से 7.4 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न की जा रही है, जिसे 15 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, यूपी के जालौन में 450 करोड़ रुपये की लागत से 110 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिससे कॉरिडोर की 60 प्रतिशत बिजली जरूरत स्वच्छ ऊर्जा से पूरी होगी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' की भी एक उत्कृष्ट मिसाल है, जिसमें लगभग 92 प्रतिशत सामग्री और तकनीक स्वदेशी है। ट्रेनों का डिजाइन हैदराबाद और निर्माण गुजरात के सावली में हुआ है, जबकि सिग्नलिंग और प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स भी भारत में ही विकसित किए गए हैं।

सुरक्षा और यात्री सुविधाओं के मामले में स्टेशनों पर आधार केंद्र, स्मार्ट लॉकर, ईवी चार्जिंग (वर्तमान में 9 स्टेशनों पर) और गाजियाबाद में 'को-वर्किंग स्पेस' जैसी आधुनिक सेवाएं शुरू की गई हैं। सुरक्षा तंत्र को मजबूत रखने के लिए एडवांस्ड सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए आवश्यकतानुसार ट्रेनों का अंतराल घटाकर 8 मिनट किया गया है और भविष्य में इसे तीन मिनट तक किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया, भविष्य के विस्तार के तहत दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-एसएनबी-बहरोड़ रूटों को केंद्र से जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है, जबकि गाजियाबाद-जेवर और नोएडा-फरीदाबाद-गुरुग्राम रूट की डीपीआर तैयार की जा रही है।

देश के आर्थिक सर्वेक्षण में भी भारत भर में लगभग 2900 किलोमीटर लंबे नए नमो भारत कॉरिडोर विकसित करने की संभावना रेखांकित की गई है।

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